सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर की समृद्ध लोक संस्कृति में फूलों के त्योहार फुल्याच पर्व की अलग पहचान है। रविवार को रिब्बा गांव में विधायक जगत सिंह नेगी ने इस पर्व का शुभारंभ किया। ग्रामीणों ने उन्हें किन्नौरी टोपी, खतक और फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों को ऐतिहासिक पर्व की बधाई भी दी।
इस मौके पर रिब्बा गांव के ग्रामीणों ने ईष्ट देवता कासुराज के देवालय में एकत्रित होकर पूजा अर्चना की। इसके बाद लोग देवता कासुराज और देवता नारायण के रथ को लेकर तीन घंटे की खड़ी चढ़ाई चढ़कर शारपो कंडे यानि (उखयांग शारपो सानतंग) में पहुंचे।
ग्रामीण यहां करीब दस दिन पहले पहुंचकर लकड़ियों और घास से अस्थायी शेड का निर्माण करते हैं। इस दौरान मेहमान नवाजी का भी खूब दौर चलता है। ग्रामीण अन्य क्षेत्रों के लोगों को बुलाकर उनकी खूब आवभगत करते हैं।
पर्व से दो दिन पहले ग्रामीण ऊंचाई वाले क्षेत्रों से गूगल, ब्रह्म कमल और ज्ञालची सहित कई अन्य दुर्लभ प्रजाति के फूलों को चुनकर लाते हैं। इन फूलों की मालाएं बनाकर देवताओं को अर्पित की जाती है। क्षेत्र में 23 सितंबर तक यह पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। शारपो सानतंग में यह परंपरा आज भी बरकरार है। ग्रामीणों के अलावा बौद्ध धर्म के लामा और जोमो भी इस पर्व में शामिल होते हैं।
पूर्वजों की याद में लोगों को करवाते हैं भोजन
पर्व के दौरान गांव के लोग पूर्वजों की याद में फूल चुनकर लाने वाले लोगों को निमंत्रित देकर भोजन करवाते हैं। मान्यता है कि पूर्वजों की आत्माएं भी इस पर्व में शामिल होती हैं।
देवता कासुराज मंदिर कमेटी के मोतमीन युद्धिष्टिर नेगी, कामदार घनश्याम नेगी, विकास नेगी, माथास अंगत नेगी, धर्मेंद्र नेगी, पुजारी सौरव कुमार, प्रधान रिब्बा राधिका नेगी और उपप्रधान कृष्ण भगत नेगी ने बताया कि इस वर्ष भी फुल्याच पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। ग्रामीणों में इस पर्व को लेकर काफी उत्साह है।