विशेषज्ञों ने बागवानों को दी योजना के साथ बगीचा तैयार करने की सलाह
बगीचे में चार से पांच प्रकार की परागण किस्में जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। बागवान इन दिनों नए पौध रोपण और ग्राफ्टिंग में जुटे हैं। नया बगीचा लगाते समय कई अहम बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है। बागवानी विशेषज्ञों ने सेब की अच्छी पैदावार के लिए बागवानों को बगीचे में कम से कम 33 प्रतिशत परागण किस्में तैयार करने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सेब की बेहतर पैदावार के लिए बगीचे में परागण किस्मों की पर्याप्त संख्या होना अनिवार्य है। अधिकांश बागवान बगीचा तैयार करते समय परागण किस्मों को लगाने पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। इसका खामियाजा उन्हें भविष्य में कम उत्पादन के रूप में भुगतना पड़ता है। नए पौधे रोपते समय और नई पौध पर ग्राफ्टिंग करते हुए परागण किस्मों की पहले से पूरी योजना बनानी चाहिए।
बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार बगीचे में चार से पांच प्रकार की परागण किस्में होनी चाहिए। परागण किस्मों में गोल्डन डिलिशियस और रेड गोल्डन प्रमुख मानी जाती हैं। इसके अलावा रॉयल सेब के बगीचों के लिए ग्रैनी स्मिथ, समरक्वीन और गलोस्टर अच्छी परागण किस्में हैं। वहीं स्पर सेब के बगीचों के लिए स्पार्टन, गोल्डन स्पर और क्रैब सेब की किस्में परागण के लिए उपयुक्त रहती हैं।
उद्यान विभाग के विषय विशेषज्ञ डॉ. संजय चौहान ने बताया कि बागवान परागण किस्मों के सेब लगाने की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं देते। उन्होंने कहा कि सेब की अच्छी और स्थिर पैदावार के लिए बगीचे में प्रभावी परागण बेहद जरूरी है। बागवानों को बगीचा सोच-समझकर और उचित योजना के साथ लगाना चाहिए। यदि बगीचे में 33 प्रतिशत परागण किस्में और चार से पांच अलग-अलग परागण किस्में लगाई जाएं, तो सभी सेब किस्मों की पैदावार बेहतर होगी।