रोहड़ू। रोहल क्षेत्र में चार दिवसीय भादो मेला पालू री जातरे पारंपरिक आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम बना हुआ है। देवता रघुनाथ पवासी के सानिध्य में यह मेला छह सितंबर को शुरू हुआ था। यह मेला नौ सितंबर को विभिन्न कार्यक्रमों के साथ संपन्न होगा। मेले के दूसरे दिन सोमवार को पांच गांवों से पहुंचीं महिलाओं और ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर देव परंपरा को जीवंत किया। इस बार मेले में महिलाओं की सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर कमेटी श्री पवासी जी, रोहल, पारंपरिक वेशभूषा को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है। देवता कमेटी के अनुसार, यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है। मेले में पांचों गांवों के लोगों के अलावा सगे-संबंधी और मित्र भी बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। चिचवाड़ी, गईचवाड़ी, मंजवाड़ी, जतवानी और थाना गांव की महिलाएं पारंपरिक बांदरी, काली, धीउरी जुड़की जैसे परिधानों में मेले में पहुंच रही हैं।