क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में मरीजों की सुरक्षा के लिए एमएस ने कड़े किए नियम
पहले केवल प्रशिक्षु छात्राएं ही लगाती थी मरीजों को इंजेक्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के आपातकालीन कक्ष में मरीजों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब प्रथम वर्ष की नर्सिंग प्रशिक्षु मरीजों को इंजेक्शन नहीं लगा सकेंगी। उन्हें केवल उपचार की बारीकियां और इंजेक्शन लगाने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। वहीं, दूसरे और तीसरे वर्ष की प्रशिक्षुओं के लिए भी स्टाफ नर्स की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में रोजाना करीब 100 मरीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। अकसर देखा गया है कि अनुभव की कमी के कारण मरीज प्रशिक्षुओं से सुई लगवाने में हिचकिचाते हैं। साथ ही, यदि इंजेक्शन के बाद किसी मरीज को कोई रिएक्शन या साइड इफेक्ट होता है, तो एंटी-डोज देने के लिए तत्काल स्टाफ नर्स को बुलाना पड़ता था। इस स्थिति में अन्य मरीज भी भयभीत हो जाते थे। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने यह सख्त कदम उठाया है।
स्टाफ नर्स की निगरानी में होगा काम
नए निर्देशों के अनुसार द्वितीय और तृतीय वर्ष की नर्सिंग छात्राएं अब केवल स्टाफ नर्स की सीधी देखरेख में ही मरीजों को इंजेक्शन लगा पाएंगी। बिना सीनियर स्टाफ की मौजूदगी के किसी भी प्रशिक्षु को प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए सभी स्टाफ नर्सों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
कोट
इंजेक्शन लगाने से पहले उसके बारे में पूरी तकनीकी जानकारी होना अनिवार्य है। अधूरी जानकारी मरीजों के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। इसलिए प्रथम वर्ष की प्रशिक्षु केवल कार्यप्रणाली को समझेंगी और जानकारी लेंगी। आपातकालीन कक्ष में बिना स्टाफ नर्स के इंजेक्शन नहीं लगेंगे, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
-डॉ. राकेश पंवार, चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) क्षेत्रीय अस्पताल,सोलन