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Rampur Bushahar News: रूमाली में दो मकानों के 12 कमरे जलकर हुए राख, दो परिवार हुए बेघर

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आनी उपमंंडल केअंतर्गत लफाली पंचायत के रूमाली गांव में  तीन भाईयों का रिहायशी मकान जलकर राख। सं
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एक गाय और एक भेड़ जिंदा जले, 50 लाख का हुआ नुकसान
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रात पौने एक बजे हुआ हादसा, एक व्यक्ति को खिड़की तोड़कर निकाला बाहर


संवाद न्यूज एजेंसी

आनी (कुल्लू)। आनी खंड की दुर्गम लफाली पंचायत के रूमाली गांव में दो लोगों के दो मकान आग में जलकर राख हो गए हैं। लकड़ी के दो मंजिला दोनों मकानों में कुल 12 कमरे थे, जिसमें एक गाय और एक भेड़ जिंदा जल गए। दोनों परिवारों के घर में रखे सोने-चांदी के आभूषण, 70 हजार रुपये की नकदी, एक छोटी दुकान समेत सारा घरेलू सामान जलकर राख हो गया है। रूमाली गांव के परमलाल और मोतूराम दोनों भाई एक मकान में रहते थे। उनके दो मंजिला मकान में रविवार देर रात अचानक आग लग गई। देखते ही देखते मकान को आग ने गिरफ्त ले लिया। इन्हीं के मकान के साथ सटे दूसरे मकान में रामानंद का परिवार रहता था। आग ने इनके मकान को भी अपनी चपेट में ले लिया और सोने-चांदी के आभूषण सहित पूरा सामान मकान के साथ जलकर राख हो गया। मकान जलने के बाद अब दोनों परिवार बेघर हो गए हैं। इसके अलावा पास रहने वाली महिला पदमा देवी के मकान को आंशिक नुकसान पहुंचा है। उनके घर की दो पानी की टंकियां और दस सेब के पौधे जलकर राख हो गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन की ओर से तहसीलदार भीम सिंह नेगी सहित उनकी टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने आग की घटना के पीड़ित दोनों परिवारों को 25-25 लाख के नुकसान का आकलन किया। दोनों परिवारों को फौरी राहत के तौर पर 35 हजार रुपये की राशि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि आग के लगने के कारणों का पता नहीं लग सका है।
रात को एक बजे लगी आग

स्थानीय पंचायत प्रधान ममता ठाकुर, निवासी पदम प्रभाकर ने बताया कि रात करीब पौने एक बजे का समय था, जब सभी ग्रामीण सो रहे थे। मकान में लगी आग को घर एक युवक ने देखा। उसने तुरंत चिल्लाना शुरू किया और घर में सो रहे परिवार को उठाया। घटना की भनक लगते ही सभी ग्रामीण राहत और बचाव कार्य में जुट गए। आनी प्रशासन और दमकल विभाग को भी सूचित किया गया। आनी और कुमारसैन से दो दमकल वाहन मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके आने से पहले ही सबकुछ जलकर राख हो गया था।
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लोगों ने एक व्यक्ति को खिड़की तोड़ बाहर निकाला
ग्रामीणों के अनुसार, आसपास के मकानों को तेज आग की लपटों से बचाया जा सका। उन्होंने कहा कि मोतूराम के साथ उनका बड़ा भाई परमलाल भी रहता है, जिसे पिछले तीन सालों से अधरंग है। उसे स्थानीय लोगों ने मकान की खिड़की को तोड़कर बाहर निकाला। उन्होंने कहा कि यदि आग को समय रहते नहीं देखा गया होता, तो कई लोगों की जान जा सकती थी। गांव में दोनों परिवारों को रहने के लिए दो कमरों का इंतजाम किया गया है। आर्थिक रूप से दोनों परिवारों की हालत खराब है, जिसे देखते हुए लोगों ने इन परिवारों को आर्थिक मदद देने की अपील की है।
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