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Rampur Bushahar News: दो माह से सूखे के कारण प्लम बगीचों को संवारने का कार्य लटका

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सूखे की मार झेल रहे बागवान, पेड़ों में न तौलिए, न खाद-गोबर डाल पा रहे किसान
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सेब के बाद गुठलीदार फल बागवानों की मुख्य आमदनी

तिलक राज कायथ
रामपुर बुशहर। दो माह से सूखे के कारण किसान-बागवानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। सूखे के कारण बागवानों के प्लम के बगीचों में तौलिए, खाद और गोबर डालने के कार्य लटक गए हैं। निचले क्षेत्रों में सेब के बाद गुठलीदार फल बागवानों की मुख्य आमदनी है।
प्लम से बागवान अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। कम ऊंचाई वाले इलाकों में प्लम की विभिन्न किस्मों को तैयार कर रहे हैं, ताकि अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकें, लेकिन मौसम के बदले मिजाज से बागवानों की नींद उड़ गई है। बीते करीब दो माह से बारिश न होने के कारण बागवानों को चिंता में डाल दिया है। सूखे के कारण जमीन से पर्याप्त नमी है। ऐसे में बागवान प्लम के बगीचों में तौलिए का कार्य नहीं कर पा रहे हैं। यदि सूखे के हालात ऐसे ही रहे तो आगामी सीजन में फलों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। समय पर बारिश और बर्फबारी होना बागवानी के लिए अति उत्तम माना जाता है। दिसंबर की बारिश और बर्फबारी से लंबे समय तक जमीन में पर्याप्त नमी बनी रहती है। इससे जहां फसल बेहतर होने की उम्मीद रहती है, वहीं पेड़ों को भी बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
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प्रगतिशील बागवान किशोर चौहान, भूपेंद्र चौहान, रणवीर चौहान, सुरेंद्र कायथ, राधा कृष्ण कायथ, शेर सिंह, मोहन सिंह, देवेंद्र सिंह, लायक राम, राकेश चौहान, विनोद, सुरेंद्र कायथ सहित कई अन्य बागवानों ने कहा कि लंबे समय से बारिश न होने के कारण प्लम के बगीचों के कार्य लटक गए हैं। पेड़ों में तौलिए नहीं कर पा रहे हैं। न ही खाद और गोबर का इस्तेमाल कर पा रहे हैं। यदि बारिश नहीं हुई तो आगामी सीजन भी प्रभावित हो सकता है। बीते दो माह से आसमान पर टकटकी लगाए बैठे हैं, ताकि जमीन को पर्याप्त नमी मिल सके।
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उधर, उद्यान विभाग रामपुर के विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार चौहान का कहना है कि सूखे में बागवान तौलिए न करें। बारिश होने के बाद ही पेड़ों में तौलिए का कार्य शुरू करें। शुष्क मौसम में पेड़ों के तौलिए करना पेड़ों के लिए भी हानिकारक हो सकता है। बागवान मौसम बरसने के बाद ही बगीचों में प्रबंधन के कार्य करें।
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