आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर रोहड़ू में हुई प्रमुख जनसंगोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शनिवार को रोहड़ू में प्रमुख जन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रोहड़ू, छौहारा, हाटकोटी और जुब्बल क्षेत्र के शासकीय अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, शिक्षा, चिकित्सा एवं कला जगत से जुड़े लोगों तथा विभिन्न सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र बौद्धिक शिक्षण प्रमुख हरीश मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, उसके उद्देश्य तथा समाज जीवन में उसके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ का मूल उद्देश्य समाज को संगठित कर भारत को समर्थ, सशक्त और परम वैभवशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।
मुख्य वक्ता ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन विषयों-सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण तथा नागरिक कर्तव्य की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने लोगों से इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन पांच विषयों पर समाज के प्रत्येक वर्ग के सहयोग से ही राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा सकता है।
उन्होंने सामाजिक समरसता को समाज की एकता का आधार बताते हुए सभी वर्गों के बीच आपसी विश्वास और सद्भाव बढ़ाने पर बल दिया। साथ ही परिवार संस्था को मजबूत बनाने, पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में जिज्ञासा-प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य, विचार और सामाजिक विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे। मुख्य वक्ता हरीश ने सभी प्रश्नों के उत्तर देते हुए प्रतिभागियों के साथ संवाद किया।
संगोष्ठी का उद्देश्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष, उसके कार्यों तथा राष्ट्र निर्माण के विचारों से परिचित कराना और सामाजिक सहभागिता को मजबूत बनाना रहा। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।