रामपुर बुशहर। वर्तमान सरकार ओपीएस बहाल करती है, तो सौ फीसदी मिशन रिपीट करेगी। अगर ओपीएस बहाल नहीं होती है तो भी सरकार को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए कर्मचारी मजबूर होंगे। यह बात एनपीएस कर्मचारी महासंघ की बैठक में एनपीएस खंड रामपुर के अध्यक्ष कमल शर्मा ने कही। बैठक में रणनीति भी तैयार की गई। इसमें एनपीएस कर्मचारी महासंघ जिला शिमला अध्यक्ष कुशाल शर्मा विशेष तौर से उपस्थित रहे।
बैठक में वोट फॉर ओपीएस के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। जिला शिमला अध्यक्ष कुशाल शर्मा ने कहा कि शिमला में 13 अगस्त से चले क्रमिक अनशन को दो महीने का समय बीत चुका है, लेकिन सरकार अभी तक ओपीएस बहाल नहीं कर पा रही है। अगर सरकार का यही रवैया रहा तो मिशन रिपीट का सपना केवल सपना बनकर ही रह जाएगा।
इस चुनाव में कर्मचारी नोटा बिल्कुल भी दबाने वाले नहीं हैं, बल्कि ओपीएस बहाल करने वाले दल को ही अपना सौ फीसदी समर्थन देंगे। ओपीएस लड़ाई न केवल एनपीएस कर्मचारियों की ही लड़ाई है, बल्कि आम जनमानस के होनहार बच्चों के भविष्य की भी लड़ाई है। हर विधानसभा में औसतन दौ हजार से अधिक एनपीएस कर्मचारी हैं, जिनके पति-पत्नी, बच्चे, मां-बाप और सास-ससुर सहित औसतन पांच से सात वोट प्रति कर्मचारी बनता है। इस तरह से यह संख्या समूचे प्रदेश में पांच से सात लाख बनती है।
अगर सरकार ओपीएस बहाल नहीं करती है तो, आगामी चुनाव में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। शर्मा ने कहा कि 20-20 विधायकों को बड़े राजनीतिक दलों के लिए छोड़ने के पश्चात शेष 28 विधायकों जिनमें से अधिकतर हजार के कम अंतराल से जीतते और हारते हैं, उनके लिए दो हजार एनपीएस कर्मचारी संबंधित विधानसभा में हराने और जिताने के लिए पर्याप्त हैं।
सरकार को चाहिए कि वह पूर्व सचेत रहें और उन्हें क्या फैसला लेना है, यह सरकार के विवेक पर छोड़ दिया है। इस मौके पर कमल शर्मा, अशोक मेहता, प्रेम चौहान, चमन ठाकुर, इब्राहिम और करण गुप्ता सहित अन्य मौजूद रहे।