रिकांगपिओ (किन्नौर)। प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग की ओ से जेबीटी के सैकड़ों पद स्वीकृत करने पर जिला किन्नौर के लिए कोई भी पद स्वीकृत न किए जाने पर जेबीटी प्रशिक्षित बेरोजगारों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग पर किन्नौर जिले के बेरोजगारों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई सालों से किन्नौर जिले में जेबीटी के पद सृजित नहीं किए जा रहे हैं। जबकि, अन्य जिलों में जेबीटी के पद सृजित किए जा रहे हैं।
बेरोजगार जेबीटी टेट क्वालिफाइड संघ के अध्यक्ष पंकज ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से 2020 में प्रदेश स्तर पर विभिन्न जिलों से 1225 पद 50 प्रतिशत बेचवाइज और 50 प्रतिशत आयोग के माध्यम से जेबीटी के पद स्वीकृत किए गए हैं। वहीं किन्नौर जिले में एक भी जेबीटी का पद स्वीकृत नहीं किया गया है। जबकि, जिले में जेबीटी टेट क्वालिफाइड बेरोजगारों की संख्या करीब 60 है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद अभी तक जिले के लिए एक भी पद स्वीकृत नहीं किया गया है। जबकि, अन्य जिलों में समय-समय पर पद स्वीकृत किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 20 मार्च 2018 में आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार एसटी के 11 पद, एससी के 6 और साधारण श्रेणी के 5 पद के साथ कुल 20 पद और एसटी वार्ड ऑफ एक्स सर्विसमैन के दस जेबीटी के पद रिक्त पाए गए हैं। संघ ने कहा कि प्रदेश सरकार और प्रदेश शिक्षा विभाग जिले के जेबीटी प्रशिक्षित बेरोजगारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना छोड़ दे या फिर जिले में स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पर ताला जड़े। उपाध्यक्ष अमृत, हेमंत, प्रोमिला, चमन, भूषण, शोभना, हीरा, जगदीश और मनीषा सहित अन्य लोगों ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग को इस पर संज्ञान लेने की बात कही है अन्यथा संघ धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होगा।
प्रारंभिक शिक्षा उप निदेशक किन्नौर नरेश गुप्ता ने बताया कि जिले में जेबीटी शिक्षकों के पद सरप्लस चल रहे हैं। जबकि समय-समय पर शिक्षकों की रिपोर्ट प्रदेश शिक्षा विभाग को भेजी जाती है।