. तौलिये और खाद का कार्य न होने से बढ़ी बागवानों की परेशानी
. एक माह बाद शुरू होगा फ्लॉवरिंग का दौर, फसल प्रभावित होने का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। लंबे समय से चल रहे सूखे के कारण गुठलीदार फलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जमीन से नमी गायब है और पेड़ों पर कैसे फल लगेंगे, बागवानों को इसकी चिंता सता रही है। बारिश न होने के कारण प्लम, बादाम समेत अन्य स्टोन फ्रूट के बगीचों के कार्य लटके हुए हैं। बागवान बगीचों में पेड़ों के तौलिये नहीं कर पा रहे हैं। पेड़ों में खाद भी नहीं डाल पा रहे हैं, जबकि बागवानों ने बगीचों में गोबर पहुंचाया है, लेकिन सूखे के कारण पेड़ों में नहीं डाल पा रहे हैं। गोबर खाद मिट्टी की उर्वरता, जड़ों के विकास को बढ़ावा देने, पौधों को आवश्यक पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम प्रदान करने में बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे पेड़ स्वस्थ रहते हैं और अच्छी पैदावार देते हैं। यह मिट्टी की संरचना सुधारता है और फायदेमंद सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देता है, लेकिन सूखे के कारण बागवान परेशान हैं। करीब एक माह बाद पेड़ों में फूल खिलने (फ्लॉवरिंग) का दौर भी शुरू हो जाएगा। सूखे के कारण बागवानों की दुश्वारियां लगातार बढ़ रही हैं। आगामी सीजन में फसल प्रभावित होने का डर सता रहा है। रामपुर उपमंडल के निचले विभिन्न क्षेत्रों में गुठलीदार फल बागवानों की मुख्य आमदनी है। यदि मौसम की बेरुखी का सिलसिला यूं ही रहा तो बागवानों को बढ़ा आर्थिक झटका लग सकता है।
फसल प्रभावित होने का डर
किशोर चौहान, रंजीत, राधा कृष्ण, सुरेंद्र, राकेश, शेर सिंह और कुलवंत ठाकुर सहित अन्य बागवानों ने कहा कि लंबे समय से बारिश न होने के कारण जमीन से नमी पूरी तरह गायब है। बगीचों में तौलिये करने और गोबर खाद डालने का कार्य लटका हुआ है। आगामी सीजन में फसल प्रभावित होने का डर सता रहा है। बहरहाल, बागवान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और बारिश-बर्फबारी की उम्मीद कर रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञ सरस्वती ठाकुर का कहना है कि सूखे के कारण आगामी फसल प्रभावित हो सकती है। समय-समय पर बारिश और बर्फबारी होना कृषि-बागवानी के लिए आवश्यक है।