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Rampur Bushahar News: रिकांगपिओ में चिकित्सकों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं

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घंटों कतार में रहने के बाद पर्ची तो कटी, लेकिन चिकित्सक नहीं मिले
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भविष्य में इस प्रकार की परिस्थितियों से निपटने के लिए ठोस नीति बनाए सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। चिकित्सकों के सामूहिक अवकाश पर जाने से शुक्रवार को रिकांगपिओ अस्पताल में भी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। जिला मुख्यालय रिकांगपिओ के क्षेत्रीय अस्पताल में ओपीडी सेवाएं बंद रहीं, जिससे दूरदराज के इलाकों से आए मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अस्पताल में पर्ची तो कटी, लेकिन चिकित्सक नहीं मिले। सुबह से ही अस्पताल के बाहर मरीजों की लंबी कतारें देखी गईं, लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी जब चिकित्सक नहींं मिले, तो कई मरीजों को बिना उपचार के ही घर लौटना पड़ा। अस्पताल पहुंचे मरीजों ने सरकार की व्यवस्था पर रोष प्रकट किया। संजय नेगी ने कहा कि मैं अपनी वृद्ध माता को इलाज के लिए करीब 50 किलोमीटर दूर गांव से लेकर आया था। यहां आकर पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर हैं। जनजातीय क्षेत्र में हमारे पास निजी अस्पतालों का विकल्प भी नहीं है। सरकार को कम से कम आपातकालीन स्थिति के लिए पुख्ता इंतजाम करने चाहिए थे। कुमुद कुमारी ने कहा कि घंटों से लाइन में खड़े रहे। पर्ची तो कट गई, लेकिन अंदर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं है। एक तरफ पहाड़ों की ठंड और दूसरी तरफ चिकित्सकों का न होना, गरीब जनता कहां जाए। स्वास्थ्य विभाग को भविष्य में ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि मरीजों को इस तरह परेशान न होना पड़े। राजेश कुमार ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में हड़ताल का सबसे बुरा असर आम जनता पर पड़ता है। प्रशासन को चाहिए कि वह सुनिश्चित करे कि किसी भी विवाद या विरोध के बीच स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवा प्रभावित न हो। क्षेत्रीय जनता ने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि भविष्य में इस प्रकार की परिस्थितियों से निपटने के लिए एक ठोस नीति बनाई जाए। लोगों का कहना है कि दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों के लिए अलग से नियमावली होनी चाहिए, ताकि किसी भी विरोध प्रदर्शन या हड़ताल के दौरान कम से कम प्राथमिक उपचार और ओपीडी सेवाएं बाधित न हों।
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