शाम के समय देवता चिखड़ेश्वर महाराज के मंदिर का एक नजारा।
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ठियोग (रामपुर बुशहर)। उत्तर भारत के सबसे प्राचीन देवता चिखड़ेश्वर महाराज की ध्वाला यात्रा का शुभारंभ 30 जनवरी से होगा। इस यात्रा में देवता 30 जनवरी को अपनी जनोग देवठी से क्षेत्र के प्रवास पर निकलेंगे। चार वर्ष बाद देवता इस ध्वाला यात्रा पर निकलेंगे और 11 दिनों तक अपने समूचे क्षेत्र का निरीक्षण करने के साथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे। 30 जनवरी को देवता महाराज की जातर का आयोजन ऐतिहासिक आलू मैदान में होगा, जिसमें क्षेत्र के हजारों लोग भाग लेंगे।
देवता के देवा विनोद झरईक के अनुसार 30 जनवरी को देवता देवरीघाट में, 31 को वजैयोग, एक फरवरी को चिचि गांव, 2 को डीडी गांव, 3 को हुल्गा, 4 को शडय़ाना, 5 को सैंज, 6 को कूड़, 7 को बड़ूं, आठ को गुलो-गुड़ी और नौ फरवरी को देवता अपनी देवठी जनोग पहुंचेंगे। यहां क्षेत्र के हजारों लोगों की मौजूदगी में देवता की जातर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पारंपरिक रैहाली आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी। 10 फरवरी को देवता चिखड़ेश्वर महाराज देवठी जनोग में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा। देवता महाराज की ध्वाला यात्रा का आयोजन हर चार वर्षों में किया जाता है। मंदिर कमेटी के प्रधान मोहन राठौर, देवां भूप राम, देवता के बजीर मोहन लाल झपटा ने बताया कि देवता की ध्वाला यात्रा को लेकर क्षेत्र के लोगों में काफी उत्साह है।