संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू) । जनजातीय क्षेत्र का दर्जा लेने के लिए चौपाल विधानसभा क्षेत्र की तहसील नेरवा, कुपवी और चौपाल के ग्रामीण अब निर्णायक लड़ाई लड़ने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, अभी आंदोलन की घोषणा तो नहीं की, लेकिन गांवों में बैठकों का दौर फिर शुरू हो गया है। लोग हर माध्यम से अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। नेरवा, चौपाल और कुपवी के पुरातन इतिहास, सामाजिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के मद्देनजर लोग जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की तर्ज पर जनजातीय दर्जा प्रदान किए जाने की मांग लंबे अर्से से कर रहे हैं। समिति के संगठन सचिव अमर सिंह सिंगटा इस विषय पर लगभग दो दशकों से शोध कर रहे हैं। अमर सिंह सिंगटा ने कहा कि प्राचीन समय में गिरिपार, नेरवा, चौपाल और कुपवी के दुर्गम क्षेत्र के लोग अपनी पीठ पर अपने उत्पाद अखरोट, केलों का तेल और सौंठ आदि लेकर सुदूर हाट (बाजार) में लेकर जाते थे। वहां से वापसी में नमक, गुड़ और कपड़ा आदि जरूरत का सामान लेकर आते थे। आज भी कई स्थानों पर हाटी लोगों की यह परंपरा नजर आ जाती है। उन्होंने तथ्य के आधार पर गिरिपार की सात तहसीलों व उप तहसीलों के साथ जिला शिमला की नेरवा, चौपाल और कुपवी दुर्गम तहसील के हाटी समुदाय को भी भारतीय संविधान के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग में अधिसूचित कर शामिल करने की मांग की है।