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Rampur Bushahar News: वन संपदा को नुकसान, फेंसिंग काटकर बना दिया कबाड़ का गोदाम

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ठियोग के भड़ियाना जंगल में नियमों को ताक पर रखकर लगाए जा रहे कचरे के ढेर, पर्यावरण हो रहा प्रदू
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वन विभाग कार्यालय से महज 300 मीटर दूर चल रहा कबाड़ का कारोबार
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. अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

सुनील ग्रोवर

ठियोग (रामपुर बुशहर)। वन संपदा और वन भूमि की सुरक्षा को लेकर विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद ठियोग के भड़ियाना के जंगल में अव्यवस्था का एक मामला सामने आया है। यहां वन क्षेत्र की फेंसिंग को कथित तौर पर काटकर कबाड़ का सामान रखने के लिए गोदाम बना दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि यह स्थान वन विभाग के कार्यालय से महज करीब 300 मीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद लंबे समय से चल रही इस गतिविधि की विभागीय अधिकारियों को जानकारी न होना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। भड़ियाना जंगल में बनाए गए इस अस्थायी कबाड़ गोदाम में बड़े-बड़े बोरों और अन्य कंटेनरों में कबाड़ का सामान भरकर रखा गया है। चिखड़ पंप हाउस को जाने वाली सड़क के किनारे भी कबाड़ से भरे बड़े-बड़े बोरे पड़े हैं। यही सड़क फोरेस्ट कॉलोनी और चिखड़ पंप हाउस की ओर जाती है। इस मार्ग से वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रोजाना गुजरते हैं, ऐसे में मामले की भनक विभाग को न लगना कई सवाल खड़े करता है। सामने आए मामले के अनुसार वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए लगाई गई फेंसिंग को काटकर कबाड़ रखने के लिए जगह तैयार की गई। इससे न केवल वन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि वन भूमि के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर वन संपदा को बचाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाए जाते हैं, वहीं वन क्षेत्र के पास इस तरह कबाड़ का जमावड़ा विभागीय निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। बताया जा रहा है कि यहां रखा कबाड़ नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों से संबंधित है। नगर के विभिन्न हिस्सों में भी इसी तरह कबाड़ रखने के लिए स्थान बनाए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, वन भूमि पर कबाड़ रखने और फेंसिंग को नुकसान पहुंचाने के मामले में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और अनुमति की स्थिति जांच का विषय है।
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नगर परिषद को नोटिस जारी किया जाएगा
मामला संज्ञान में आने के बाद डीएफओ मनीष रामपाल ने मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और नगर परिषद को लिखित नोटिस जारी किया जाएगा। संबंधित स्थान को जल्द खाली करवाने के निर्देश दिए जाएंगे और मामले में सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए एक सप्ताह की समय सीमा निर्धारित की गई है। वन विभाग के इस रुख के बाद अब देखना होगा कि निर्धारित समय सीमा में वन क्षेत्र से कबाड़ हटता है या नहीं और फेंसिंग को हुए नुकसान की भरपाई, जिम्मेदारी तय करने को लेकर क्या कार्रवाई अमल में लाई जाती है।
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