महिलाओं और पुरुषों ने वाद्य यंत्रों की धुनों पर डाली नाटी
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। किन्नौर के आदर्श गांव बटसेरी में शनिवार से पारंपरिक फूल्याच पर्व का शुभारंभ हो गया। तीन दिवसीय ऐतिहासिक पर्व के पहले दिन गांव के इष्ट देवता बद्रीनारायण, विष्णु नारायण और तपो नारायण की उपस्थिति में ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ नाचते गाते राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बटसेरी के प्रांगण में पहुंचे। यहां दिनभर किन्नौरी लोक नृत्य कायंग (नाटी) का दौर चलता रहा।
ढोल-नगाड़ों की थाप पर महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक नाटी डालकर पर्व की खुशियों को साझा किया। फूल्याच पर्व क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति, देव परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक माना जाता है। पर्व के दौरान बटसेरी गांव में पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला और पुरुषों ने ढोल-नगाड़ों की धुन पर सामूहिक नाटी डाली। ग्रामीणों ने अपने सगे-संबंधियों के साथ खुले आसमान के नीचे सामूहिक भोजन ग्रहण किया। पूरे गांव में आपसी भाईचारे और पारंपरिक संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। शाम के समय ऊंची पहाड़ियों से विशेष रूप से लाए गए ब्रह्मकमल, रत्नज्योत सहित अन्य बहुमूल्य एवं पवित्र फूलों से देवताओं का शृंगार किया गया। देवता के कारकूनों ने फूल मालाएं अर्पित कर देव परंपरा का निर्वहन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने देवताओं के समक्ष शीश नवाकर सुख-समृद्धि की कामना की।
देवता बद्रीनारायण के मोतमीन मनोज नेगी, माथास गोवर्धन सिंह नेगी, पुजारी गंगा सिंह नेगी और माली महावीर सिंह नेगी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार भी फूल्याच पर्व को धूमधाम से मनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों और देव संस्कृति का पूरी श्रद्धा के साथ निर्वहन कर रहे हैं।