रामपुर बुशहर। रामपुर उपमंडल में चल रहे क्रशर प्लांट बंद होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है। हालत यह है कि निर्माण सामग्री नहीं मिलने से निजी निर्माण कार्यों के साथ ही सरकारी विकास कार्यों पर भी इसका प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। प्रदेश में लघु खनिज और खनिज नियम 2015 में किए गए संशोधनों का क्रशर मालिक विरोध कर रहे हैं।
इसको लेकर सात नवंबर से रामपुर उपमंडल के सभी क्रशर प्लांट ओनर्स हड़ताल पर चल गए हैं। इसका असर पर अब लोगों के निर्माण कार्यों पर पड़ना शुरू हो गया है। लोग बजरी और रेत की कमी से जूझ रहे हैं। शिमला क्रशर ओनर्स (कल्याण) परिषद ने चेतावनी दी है कि अगर 12 नवंबर तक सरकार ने जारी की गई अधिसूचना को वापस नहीं लिया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
इससे पहले शिमला क्रशर ओनर्स (कल्याण) परिषद की बैठक आयोजित की गई। इसमें 10 फरवरी 2022 खनन की धारा 23 ष्ट के साथ पठिथ धारा 15 और खनिज अधिनियम, 1957 और हिमाचल प्रदेश लघु खनिज और खनिज नियम, 2015 में संशोधनों पर हिमाचल सरकार के किए परिवर्तनों के संबंध में चर्चा की गई गई। क्रशर प्लांट ओनर्स परिषद रामपुर के अध्यक्ष ओपी मेहता, राजेंद्र कश्मीरी, संजीव मेहता, यशविंद्र ठाकुर, एमजी मेहता, अतुल शर्मा, चुन्नी लाल वर्मा, कुलदीप मेहता, अनु ठाकुर और हरीश गोस्वामी ने कहा कि सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश स्थित स्टोन क्रशर/माइनिंग लीज पर खनन क्षेत्रों में उत्खनन के उपयोग पर प्रभारित सुरक्षा एवं वार्षिक शुल्क, खनन योजना के 60% प्रतिवर्ष की अग्रिम रॉयल्टी का भुगतान, रॉयल्टी को 60 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति टन किया गया है, जो सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि शिमला क्रेशर ओनर्स (वेलफेयर) काउंसिल के साथ-साथ क्रशर ओनर्स (वेलफेयर) काउंसिल हिमाचल ने कई बार सरकार से यह मामला उठाया है, लेकिन सरकार से मात्र आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि शिमला क्रेशर ओनर्स (कल्याण) परिषद ने सामूहिक रूप से आम जनता और सरकार को बजरी सहित रेत की आपूर्ति बंद कर दी है। उन्होंने चेताया कि अगर 12 नवंबर तक सरकार अधिसूचना वापस नहीं लेती तो उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल का रुख करना पड़ेगा। इससे क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।