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रामपुर, आउटर सिराज क्षेत्र में खनन, अफसरशाही मौन

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रेत - फोटो : अमर उजाला ब्यूराे
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रामपुर बुशहर। सत्ता पर काबिज हुई जयराम ठाकुर सरकार क्या राज्य में हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए शीघ्र कोई कारगर कदम उठाएगी, इसे लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। सत्ता में आने से पहले भले ही भाजपा ने भू माफिया, खनन माफिया और शराब माफिया के सक्रिय होने की बात कह कर पूर्व कांग्रेस सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रामपुर और आउटर सिराज क्षेत्रों में खनन माफिया धड़ल्ले से अवैध तरीके से रेत और बजरी बेच रहा है और अफसरशाही आंखें मूंदे हुए हैं।
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गिनती के मामले ही अवैध खनन के पकड़े जा सके हैं और थोड़ा बहुत जुर्माना कर इतिश्री की जा रही है। कई अधिकारियों ने खनन माफिया पर शिकंजा कसने के लिए कमर कसी थी। लेकिन उनको स्थानांतरित कर दिया जाता है। मंगलवार को रामपुर एसडीएम निपुण जिंदल और डीएसपी देव कुमार नेगी के नेतृत्व में अवैध रूप से बेची जा रही रेत को जब्त किया। एक साल में अवैध रेत ढुलाई का यह पहला मामला पकड़ा गया है। मामले में स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कड़ी कार्रवाई भी की है। जिला शिमला के रामपुर क्षेत्र और कुल्लू जिले के आउटर सिराज क्षेत्र में अवैध खनन का गोरखधंधा पिछले कई सालों से चला हुआ है। दोनों जिलों में अवैध खनन रोकने के लिए बाकायदा खनन विभाग के अधिकारियों की तैनाती भी की गई है। इसके बावजूद खनन माफिया के आगे खनन विभाग के अधिकारियों की टीम बौनी साबित हो रही है। जब भी अवैध रूप से लाई जा रही रेत और बजरी से भरे वाहन पकड़े जाते हैं तो मंडी और ऊना के कागज दिखाकर यह दर्शाने की कोशिश की जाती है कि माल मंडी और ऊना की खानों से लाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है।

जिलों की सीमाओं में नाके की व्यवस्था नहीं
सरकार ने अभी तक जिलों की सीमाओं में खनन विभाग के नाके तक नहीं लगाए हैं। न ही पुलिस निगरानी रखी जाती है। ऐसे में सरकार के पास अवैध खनन पर पैनी नजर रखने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। अगर सरकार जिलों में नाके लगाकर रेत और बजरी ढोने वाले वाहनों पर कड़ी नजर रखे तो पता लगाया जा सकता है कि रेत-बजरी किस जिले से लाई जा रही है।
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शिकायत मिलने पर की जाती है कार्रवाई : निपुण
एसडीएम रामपुर निपुण जिंदल ने बताया कि किसी की शिकायत आने पर ही अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों को पकड़े जाने के बाद कोर्ट में भेज दिया जाता है। उनका कहना है कि रामपुर के पास जिस रास्ते से खनन माफिया सक्रिय रहता है, वहां बागवानी विभाग की जमीन है। विभाग से कहा गया है कि इस रास्ते को बंद किया जाए। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि रास्ता बंद करने के लिए मामला उच्चाधिकारियों से उठाया गया है। फंड न होने के कारण रास्ता बंद करने में परेशानी आ रही है।
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