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सीपीएड शारीरिक 15 साल की लड़ाई के बाद भी झेल रहे दंश : संघ

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अन्य राज्यों की तर्ज पर सीपीएड शारीरिक शिक्षकों को भी मिले रोजगार
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सरकार से नीति बनाकर राहत देने की लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
एससीवीटी, सीपीएड शारीरिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से ठोस नीति बनाने की मांग की है। संघ ने कहा कि सीपीएड वो शारीरिक शिक्षक हैं, जिन्हें हिमाचल सरकार की ओर से प्रशिक्षण दिया गया है। दिन-रात कड़ी मेहनत कर 5349 शारीरिक शिक्षक उत्तीर्ण हुए हैं लेकिन 15 साल की लड़ाई के बाद भी उनका रोजगार का सपना अधूरा रह गया है। संघ ने कहा कि अन्य राज्य में सीपीएड शारीरिक शिक्षकों के हितों में फैसला सुनाया गया है। इसके लिए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक जीते-जागते उदाहरण हैं। संघ ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले ट्रेनिंग करवाती है और अपने चहेतों को नौकरी देने के बाद गरीब और बेरोजगारों का शोषण किया जाता है। एससीवीटी, सीपीएड शारीरिक संघ के सदस्य ब्रज मार्कंडेय, सन्नी, बूटा सिंह, दया सिंह, राकेश मंडयाल, आत्म राम, उर्मिला, विद्या देवी, मनसा राम, आशीष कुमार, हरीश, निर्मला, स्नेह लता, जगपाल, सितेंद्र कुमार, रोशन लाल, कपिल, छतर सिंह सहित अन्य ने कहा कि एससीवीटी (स्टेट काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग) हिमाचल में 2004-2005 में आई, जिसमें दर्जनों के हिसाब से हिमाचल सरकार के की ओर से वोकेशनल कोर्सेज संस्थान खोले गए। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हिमाचल के बच्चों को शारीरिक शिक्षक का प्रशिक्षण देने के लिए प्रदेश में एसवीटी के तहत प्रशिक्षण करवाया था। इसमें आयुर्वेदिक डॉक्टर, ड्राइंग मास्टर और शारीरिक शिक्षक जैसे प्रशिक्षण शामिल थे। वर्तमान सरकार अन्य प्रशिक्षण वालों को तो नौकरी दे रही है। बैच वाइज भी बुला रही है लेकिन सीपीएड शारीरिक शिक्षकों को पूर्ण रूप से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। प्रदेश में जो पॉलिसी गरीब और बेरोजगार परिवारों के लिए चलाई गई थी, वह उनका सार्थक नहीं बन पाई। सरकार अपने चहेतों को 20 साल पहले नौकरी दे बैठी और बेरोजगार, गरीबों पर 2011 में आरएंडपी रूल को थोपा गया। सीपीएड शारीरिक शिक्षक 2011 से यह लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन उन्हें आज दिन तक इन्साफ नहीं मिला। 2011 से अब तक हिमाचल में आई सरकारों ने केवल झूठे आश्वासन दिए। वर्तमान सरकार के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से भी 3 सालों से लगातार मिलते आ रहे हैं लेकिन हमें खाली आश्वासन ही मिल रहा है। हाल ही में 870 पद जो रिक्त पड़े हैं, उनसे भी हमें वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से सीपीएड शारीरिक शिक्षकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए नीति बनाकर रोजगार मुहैया करवाने की मांग की है।
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