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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस मामले में दोषी की अपील खारिज, छह माह की कैद बरकरार

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अदालत ने दो लाख रुपये के मुआवजे के आदेश को भी बरकरार रखा
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13 जुलाई तक विचारण अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया

संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किन्नौर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से दोषी को सुनाई गई छह महीने की साधारण कैद और दो लाख रुपये के मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा है। दोषी बीर सिंह को 13 जुलाई तक विचारण अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया है। यह मामला एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की ओर से दाखिल शिकायत से संबंधित है। बैंक के अनुसार, बीर सिंह ने आठ लाख रुपये का ऋण लिया था। वह तय समय पर ऋण चुकाने में विफल रहा, जिस पर 2,36,882 रुपये बकाया थे। अपनी देनदारी चुकाने के लिए उसने 1,42,400 रुपये का एक चेक जारी किया था। यह चेक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। बैंक ने 23 अक्टूबर, 2019 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन बीर सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया। रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट है कि आरोपी ने शिकायत का विरोध केवल समय बिताने के लिए किया। इन्हीं आरोपों के आधार पर निचली अदालत ने 30 जुलाई, 2025 को बीर सिंह को दोषी ठहराया था। बीर सिंह ने अपील में तर्क दिया कि निचली अदालत ने तथ्यों को ठीक से नहीं समझा और फैसला कानून के खिलाफ है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपीलकर्ता और प्रतिवादी के वकीलों की दलीलें सुनीं। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता बैंक ने अपने दावे को पर्याप्त सबूतों से साबित किया है। अदालत ने यह भी पाया कि बीर सिंह अपने बचाव के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। केवल जिरह के दौरान सुझाव देना बचाव साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया। इसलिए, अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।
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