. कंपनियां अगस्त के दूसरे सप्ताह से शुरू कर देती थी खरीद
. मंडियों में भी 500 रुपये प्रति पेटी गिरे दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब सीजन का आधा समय बीत चुका है लेकिन कंपनियों ने अभी तक सेब की खरीद शुरू नहीं की है। इससे स्थानीय बागवानों की चिंता बढ़ गई है। आमतौर पर कंपनियां अगस्त के दूसरे सप्ताह से खरीद शुरू कर देती हैं लेकिन इस बार तीसरे सप्ताह तक खरीद केंद्र नहीं खुले हैं। स्थानीय मंडियों में भी सेब के दाम लगातार कम हो रहे हैं। बीते एक सप्ताह में सेब के दाम करीब 500 रुपये प्रति पेटी तक कम हुए हैं। बागवानों का कहना है कि इस वर्ष सेब की पैदावार पिछले वर्षों की तुलना में कम है। मौसम की मार और ओलावृष्टि से कई क्षेत्रों में फसल प्रभावित हुई है। कम उत्पादन के बावजूद बेहतर दाम मिलने की उम्मीद थी। कंपनियों की खरीद शुरू न होने और मंडियों में दाम गिरने से बागवानों को दोहरी चिंता का सामना करना पड़ रहा है। बागवान हितेंद्र ठाकुर ने कहा कि कंपनियों के खरीद केंद्र खुलने से मंडियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। इससे बागवानों को अपनी फसल बेचने के लिए अधिक विकल्प मिलते हैं। कंपनियों की खरीद शुरू नहीं होने के कारण अधिकांश सेब मंडियों पर ही निर्भर हैं। इससे मंडियों में आवक और मांग के बीच संतुलन बिगड़ने का असर कीमतों पर दिख रहा है। बागवान बीएस चौहान ने बताया कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। दवाइयां, खाद, मजदूरी और परिवहन जैसे खर्च काफी बढ़ चुके हैं। कम फसल के बावजूद यदि दाम गिरते रहे तो उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल होगा। यह स्थिति कई बागवानों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। बागवानों ने सरकार से जल्द खरीद केंद्र शुरू करने की मांग की है। उन्होंने बाजार में सेब के उचित दाम सुनिश्चित करने की भी अपील की है। उनका कहना है कि कंपनियों की खरीद शुरू होने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे बागवानों को अपनी फसल के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद जगेगी। आने वाले दिनों में नई किस्मों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों से आवक पर भी बाजार की दिशा निर्भर करेगी।