रामपुर, नीरथ और झाकड़ी में किए प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र सीटू के आह्वान पर रामपुर, नीरथ, बायल, झाकड़ी और नाथपा में राष्ट्रीय मांग दिवस मनाया गया। ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन, धरना, गेट मीटिंग और श्रम संहिताओं की प्रतियां जलाकर कर केंद्र सरकार की की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। सीटू शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा, राहुल विद्यार्थी, दिनेश मेहता, नीलदत ने कहा कि मजदूर वर्ग अपने अधिकारों पर हो रहे हमलों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। सीटू कार्यकर्ताओं ने चारों श्रम संहिताएं वापस लेने, मजदूरों का दमन बंद करने, न्यूनतम वेतन 26,000 लागू करने, ठेका प्रथा खत्म करने और मजदूर-किसान एकता जिंदाबाद नारे लगाए। कुलदीप डोगरा ने कहा कि उत्तर भारत, दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों पर हुए दमन के खिलाफ प्रदर्शन किए गए। बीते कुछ माह में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से मजदूर वर्ग के लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमले तेज किए गए हैं। हजारों मजदूरों, यूनियन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए और गिरफ्तारियां की गई। फैक्ट्रियों में पुलिस निगरानी बढ़ाई गई और मजदूरों की सामूहिक बैठकों, गेट मीटिंगों और पर्चा वितरण तक को रोकने का प्रयास किया गया। राहुल ने कहा कि यह केवल मजदूरों पर हमला नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की मूल भावना पर हमला है।
दिनेश ने कहा कि वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियां संहिता 2020 वास्तव में मजदूरों को उनके अधिकारों से वंचित करने की साजिश हैं। वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों, किसानों, छात्रों, युवाओं और आम जनता की व्यापक एकता बनाकर इस कॉर्पोरेट-समर्थित मजदूर विरोधी एजेंडे के खिलाफ संघर्ष को और तेज किया जाएगा। आने वाले समय में प्रतिरोध और संघर्ष को और व्यापक रूप दिया जाएगा।