ठियोग क्षेत्र के प्रवास से अपने मंदिर पहुंचे चिखड़ेश्वर महादेव। स्रोत : मंदिर कमेटी
ढोल-नगाड़ों की थाप पर जयकारों से गूंज उठा मंदिर
आराध्य देवता के स्वागत के लिए उमड़े हजारों श्रद्धालु
पारंपरिक वेशभूषा में देवता संग झूमे कारदार और देवलू
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ठियोग रियासत के आराध्य देवता चिखड़ेश्वर महाराज की पावन ध्वाला यात्रा 24 दिनों के बाद संपन्न हो गई। तीन साल के लंबे अंतराल के बाद निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को आस्था के रंग में रंग दिया। जैसे ही देवता महाराज अपने मूल स्थान चिखड़ पहुंचे पूरा क्षेत्र ढोल-नगाड़ों की थाप पर जयकारों से गूंज उठा। मंदिर प्रांगण में आयोजित भव्य जातर में देवलू और कारदार पारंपरिक वेशभूषा में देवता संग झूमते नजर आए। देव परंपराओं के निर्वहन के साथ हुए इस आयोजन ने वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। देवता महाराज के स्वागत के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े, जिनमें दूरदराज के गांवों से आए लोग भी शामिल थे। इस भावुक क्षण में महिलाओं ने भीगी पलकों के साथ अपने इष्ट देव का स्वागत किया। 24 दिनों तक चली इस ध्वाला यात्रा के दौरान देवता चिखड़ेश्वर महाराज ने अपने समस्त साम्राज्य का भ्रमण किया। गांव-गांव पहुंचकर देवता ने श्रद्धालुओं के घरों, खेतों और पशुधन को सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और खुशहाली का आशीर्वाद दिया। जगह-जगह देवता के स्वागत में पारंपरिक पूजा-अर्चना, भंडारे और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। ध्वाला यात्रा के समापन के उपलक्ष्य में सोमवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में सेवा भाव, अनुशासन और सामूहिक सहयोग की सुंदर झलक देखने को मिली।