रहीघाट से जनोघाट तक एनएच की हालत बनी हुई है खस्ता
बीते दो वर्षों में सड़क सुधारने की मांग कर रहे हैं व्यापारी
अजय ठाकुर
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ठियोग को ऊपरी शिमला का मुख्यद्वार कहा जाता है। लेकिन कई वाहन चालक जैसे ही बाईपास के जीरो प्वाइंट पर पहुंचते हैं, तो वाहन को बाईपास की ओर मोड़ लेते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि बाजार के अंदर की सड़क के इतने खस्ताहाल हैं कि यह ही मालूम नहीं होता कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। इसके कारण यहां कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
पहले तो जल शक्ति विभाग की ओर से शहर की सीवरेज लाइन को बिछाया जा रहा था। इसके बाद जगह-जगह पर चैंबर बन गए। करीब एक साल पहले बिजली घर से थोड़ी दूरी पर सड़क का डंगा गिर गया। उस समय बाईपास बनकर तैयार नहीं हुआ था, फिर वहां पर बेली ब्रिज बनाया गया। वर्तमान समय में बेली ब्रिज की जगह डंगा लग चुका है, लेकिन खराब सड़क के कारण यहां से गाड़ी निकालना किसी चुनौती से कम नहीं है। सड़क पक्की करने को लेकर एनएचएआई पहले बरसात का मौसम होने की दलील देता रहा, लेकिन अब मौसम साफ है। इसके बावजूद सड़क को पक्का करने का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा।
रहीघाट से जनोघाट तक एनएच पांच की हालत बीते दो वर्ष से बदतर बनी हुई है। सड़क खराब होने के कारण व्यापारी वर्ग को सबसे अधिक चिंता सता रही है, क्योंकि अधिकतर वाहन बाईपास होकर निकल जाते हैं, जिससे बाजार के कारोबार पर इसका फर्क पड़ा है। रहीघाट के जीरो प्वाइंट से पहले राजन टायर होते हुए रहीघाट का बाजार आता है, जहां करीब 30 व्यापारी दुकानें चलाते हैं। नगर परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा का भी यहां पर कारोबार है। उन्होंने बताया कि सड़क की बुरी हालत के कारण यहां व्यापारी भी बीमार पड़ रहे हैं। धूप के दिनों में धूल गुब्बार तो बरसात में कीचड़ से लोग परेशान होते हैं।
कारोबारी अनूप गुप्ता ने बताया कि लाखों रुपये लगाने के बाद भी ग्राहक देखने को नहीं मिलता। इसके बाद अस्पताल को जाने वाली सड़क के साथ ही नए बाजार में पहुंचते हैं। यहां कारोबार करने वाले सौरभ लठ ने बताया कि सड़क के पक्का न होने के कारण लोग दुकानों के बाहर ही अपनी गाडिय़ों को खड़ा कर देते हैं। करीब दो साल से बाजार के कारोबार पर ग्रहण लग गया है। रेस्ट हाउस के पास वीवीआईपी मूवमेंट रहती है। अधिकारी चाय की चुस्कियां लेते हैं, लेकिन सड़क की हालत किसी को दिखाई नहीं देती। पुराना बस अड्डा से लेकर प्रेम घाट चौक तक करीब 200 दुकानदार हैं, जोकि कई मर्तबा सड़क की मरम्मत को लेकर एनएच विभाग से मुलाकात कर चुकें हैं लेकिन कोई हल नहीं निकला। कारोबारी संजू गुप्ता, राजू गुप्ता, निशांत मित्तल, शंकर सिंह, राजकुमार इंदोरिया सहित अन्य ने कहा कि सड़क सुधारने की मांग कई मर्तबा प्रशासन के समक्ष रखी गई है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
उपमंडलाधिकारी ठियोग मुकेश शर्मा ने कहा कि बाजार की सड़क का मामला मेरे संज्ञान में है। एनएचएआई के अधिकरियों को कहा गया है कि जैसे ही बजट आएगा प्राथमिकता से बाजार की सड़क को दुरुस्त किया जाए।
उधर, एनएचएआई के एक्सईएन रवि कपूर ने बताया कि सड़क को पक्का करने, नालियों और डंगों के लिए चार करोड़ रुपये के बजट की मांग की गई है। बजट का प्रावधान होते ही सड़क सुधारने का कार्य शुरू किया जाएगा। संवाद