संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने देश के सेब बागवानों से यह वादा किया था कि सेब पर आयात शुल्क तीन गुना किया जाएगा और सेब को स्पेशल कैटेगरी में शामिल किया जाएगा, लेकिन आज यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि यह वादे केवल चुनावी जुमले बनकर रह गए हैं। रोहित ठाकुर ने कहा कि बागवानों के हितों की रक्षा करने के बजाय केंद्र की भाजपा सरकार ने पहले न्यूजीलैंड, फिर यूरोपियन यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत सेब पर आयात शुल्क में कमी की। अब अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापारिक समझौते में भी आयात शुल्क घटाने की तैयारी की जा रही है, जो भाजपा की कथनी और करनी के बीच गहरे अंतर को दर्शाता है। केंद्र सरकार के ये फैसले हिमाचल प्रदेश सहित देश के सेब उत्पादक बागवानों के हितों के प्रतिकूल हैं। उन्होंने कहा कि इन बागवान-विरोधी नीतियों का सबसे अधिक दुष्प्रभाव हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और अन्य सेब उत्पादक राज्यों पर पड़ेगा। सस्ते आयातित सेब के कारण घरेलू सेब को बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। इससे बागवानों की लागत, मेहनत और आय पर सीधा व गहरा प्रभाव पड़ेगा। शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह सेब उत्पादक बागवानों से किए गए अपने चुनावी वादों को निभाएं।