रोहल पंचायत में देवता महाराज पवासी का पारंपरिक भादो मेला ''पालु री जातरे'' रविवार को दैविक परंप
ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर किया जमकर नृत्य
कुल देवता के समक्ष बताईं सालभर के दुख और तकलीफें
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
रोहल पंचायत में देवता महाराज पवासी का पारंपरिक भादो मेला पालु री जातरे रविवार को दैविक परंपराओं के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर स्थानीय देवता विष्णु नारायण भी उपस्थित रहे। मेले के पहले दिन ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर जमकर नृत्य किया। मेले की शुरुआत भेड़पालकों के मेले से हुई। दोपहर बाद स्थानीय भेड़पालकों ने कुल देवता पर पवित्र फूल मालाएं अर्पित कीं। ये फूल लगभग 17 हजार फीट की ऊंचाई से चुनकर लाए जाते हैं। इन फूलों को तोड़ने वाले व्रत भी रखते हैं। इनमें ब्रह्मकमल, नेसर और सुपाली जैसे फूल शामिल हैं, जिन्हें मालाओं में गुंथा जाता है। परंपरा के अनुसार पहले दिन भेड़पालक कुल देवता के समक्ष सालभर के दुख और तकलीफें भी बताते हैं। मंदिर कमेटी रोहल ने सांस्कृतिक विरासत और रीति-रिवाजों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों को पारंपरिक वेशभूषा में ही मेले में आने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों का पालन करते हुए सभी पारंपरिक परिधान पहनकर पहुंचे। पहले दिन मंजवाड़ी, जतवानी और गंईचवाड़ी गांव की सैकड़ों महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा जुड़की पहनकर मेले में पहुंचीं। देवता पवासी के मोतमीन कैलाश मेहता ने बताया कि मेले का आयोजन सफलतापूर्वक किया जाएगा। दूसरे दिन सोमवार को थाना गांव की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में देवता की पालकी के साथ रहेंगी।