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Rampur Bushahar News: खराब मौसम से सेब में मार्सोनीना लीफ ब्लॉच रोग का बढ़ा खतरा

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कृषि विज्ञान केंद्र की सेब बागवानों को सतर्क रहने की सलाह
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। जिला कृषि विज्ञान केंद्र ने लगातार हो रही बारिश से सेब के बगीचों में मार्सोनीना लीफ ब्लॉच रोग से बागवानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अप्रैल और मई माह में लगातार हो रही बारिश और अनुकूल तापमान के कारण इस रोग के फैलने की आशंका बढ़ गई है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय रोग के प्राथमिक बीजाणु सक्रिय होकर संक्रमण फैलाना शुरू कर देते हैं, जिससे सेब की फसल प्रभावित हो सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी एवं विशेषज्ञ वैज्ञानिक डाॅ. उषा शर्मा ने बताया कि यह रोग मार्सोनीना कोरोनारिया नामक फफूंद से होता है। इसके बीजाणु सर्दियों में गिरे हुए संक्रमित पत्तों में जीवित रहते हैं। वसंत ऋतु में 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान और अधिक नमी मिलने पर तेजी से फैलते हैं। बारिश की बूंदों और हवा के माध्यम से ये बीजाणु स्वस्थ पत्तियों तक पहुंचते हैं और संक्रमण शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार नमी और धूप के बीच इनके संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका सामने आ चुकी है। विशेषज्ञ ने बताया कि बीमारी के शुरुआती लक्षण पत्तियों पर छोटे भूरे धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। समय के साथ ये धब्बे बड़े होकर पत्तियों के समय से पहले झड़ने का कारण बनते हैं। इससे न केवल फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि अगले वर्ष की फसल पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने बागवानों को सलाह दी है कि अखरोट आकार के फल आने पर विश्वविद्यालय की ओर से अनुमोदित फफूंदनाशकों का छिड़काव अवश्य करें। इसके बाद 18 से 21 दिन के अंतराल पर नियमित छिड़काव जारी रखें। साथ ही फफूंदनाशकों को कीटनाशकों या सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ मिलाकर इस्तेमाल न करने और नौणी विश्वविद्यालय की छिड़काव सारिणी का पालन करने की अपील की गई है। समय पर रोकथाम से रोग के संक्रमण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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