बारिश और हिमपात न होने से चिलिंग ऑवर्स पूरे होने पर संशय
फसल के बेहतर उत्पादन के लिए पेड़ों को 800 से 1600 घंटे की चिलिंग ऑवर्स की रहती है आवश्यकता
सूखे से आगामी सीजन में गिर सकता है सेब उत्पादन, पेड़ों में बीमारियां फैलने का खतरा, बागवान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। करीब तीन माह से चल रहे ड्राई स्पेल के कारण बागवानों की नींद उड़ गई है। सूखे जैसे हालात होने से प्रदेश में करीब पांच हजार करोड़ के सेब कारोबार पर संकट मंडराने लगा है। बारिश और बर्फबारी न होने से सेब के बगीचे सूखे की चपेट में हैं। यदि चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं हुए तो आगामी सीजन में सेब उत्पादन गिर सकता है।
बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो सेब के पेड़ों के लिए 7 डिग्री सेल्सियय से कम तापमान में 800 से 1600 घंटे चिलिंग ऑवर्स की जरूरत रहती है। सूखे के कारण इस सीजन में यदि चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं हुए तो फ्लावरिंग प्रभावित हो सकती है। फ्लावरिंग सही तरीके से नहीं हो पाएगी और फलों की सेटिंग नहीं होगी। इसके कारण सेब उत्पादन प्रभावित हो सकता है। सूखे के कारण कैंकर रोग और वूली एफिड का प्रकोप बढ़ सकता है। बागवान खासे परेशान हैं। आगामी कुछ दिनों में यदि अच्छी बारिश और बर्फबारी नहीं हुई तो बागवानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
सुनील चौहान, प्रेम राज, अजय चौहान, रणजीत, दीप सिंह, फकीर ठाकुर, सनम, इंद्रजीत कायथ सहित अन्य बागवानों ने कहा कि सूखे के कारण सेब के बगीचों में चिलिंग ऑवर्स की समस्या खड़ी हो गई है। सेब के बेहतर उत्पादन के लिए चिलिंग ऑवर्स पूरे होने अति आवश्यक हैं। सूखे के कारण कैंकर रोग की चपेट में भी पेड़ आ रहे हैं। सूखे के कारण सेब के पेड़ों की काटछांट में भी परेशानियां पेश आ रही हैं। पेड़ों पर धूल ही धूल है और प्रूनिंग करने में दिक्कतों से जूझ रहे हैं। नए पौधे लगाने के लिए जमीन में पर्याप्त नमी भी नहीं है। तौलिये के कार्य भी लटक गए हैं। बागवान पूरी तरह से हताश हैं।
उधर, बागवानी विभाग रामपुर के विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. संजय चौहान का कहना है कि कैंकर ग्रस्त पेड़ की काटछांट के बाद कैंची को साफ करें। पेड़ को रोग से बचाव के लिए तने पर बोर्डो पेंट या ताजे गोबर और मिट्टी का लेप लगाएं। प्रूनिंग के बाद बोर्डो मिश्रण की स्प्रे करें।