रोहड़ू। बागवानी के लिए सरकार की ओर से बनाए आदेशों पर आढ़तियों और खरीदारों की मनमानी भारी पड़ रही है। बागवानों को मंडियों में सुनिश्चित योजना के तहत नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सेब पैकिंग पर सरकार की ओर से अधिसूचना लाने के बाद एपीएमसी अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। सेब बाहुल क्षेत्र के बागवान असमंजस की स्थिति में हैं।
विपणन और पैकिंग के लिए लंबे समय से लंबित मांग को सरकार ने अधिसूचना जारी करके पूरा किया। अब कानून बागवानों पर ही भारी पड़ रहा है। कानून का पालन करने वाले बागवानों को मंडियों में आढ़ती और खरीदार नुकसान पहुंचा रहे हैं। कभी बिना पूर्व सूचना के हड़ताल, कुछ मंडियों में दो किलो की कटौती तो कई मंडियों में छोटे सेब का दाम आधा दिया जा रहा है, जबकि नियम के अनुसार सेब की पेटी का वजन 24 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए। सेब सीजन रफ्तार पकड़ रहा है, वहीं बागवान परेशान हैं कि कैसे मंडियों में उनके उत्पाद का उचित दाम मिल सके। ओवर वेट पेटियों के दाम की तुलना 24 किलोग्राम तक की पेटी को बहुत कम दाम पर बेचा जा रहा है। ऊपर से दो किलो की कटौती की जा रही है। हालांकि रोहड़ू उपमंडल में इस मामले को लेकर एसडीएम सन्नी शर्मा लोगों को लगातार जागरूक कर रहे हैं। बागवानों को सलाह भी दी जा रही है कि यदि कोई शिकायत करना चाहे तो उनसे सीधा संपर्क कर सकते हैं।
कई दिनों से चल रहे इस खेल को रोकने के लिए अब बागवानी संगठन भी सामने आ रहे हैं। प्रदेश संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान का कहना है कि आढ़ती तथा खरीदार सरकारी आदेशों का पालन करने वाले बागवानों को परेशान कर रहे हैं। दो किलो वजन में कटौती पर बिना पूर्व सूचना के मंडियों में हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की ओर से इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो सड़कों पर उतरना पड़ सकता है। उन्होंने कहा बागवान परेशान हैं। सरकार इस मामले को गंभीरता से ले।