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बैरियरों पर बागवानों से लूट, मार्केटिंग फीस

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रोहड़ू। सरकार के लाख दावों के बाद भी बागवानों से लूट नहीं रुक रही है। बैरियरों पर बागवानों से तीन रुपये प्रति सेब पेटी मार्केटिंग फीस वसूल की जा रही है। सरकारी आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं। नियमों के अनुसार मार्केटिंग फीस सेब के खरीदार से वसूल की जाती है। सब्जी मंडी में क्यू फार्म पर इस वसूली को दर्ज किया जाता है। इसका भुगतान सेब खरीदने वाले कारोबारी से होता है। बागवान स्वयं सेब लेकर बाहरी राज्यों की मंडियों में जाए तो उससे फीस वसूल नहीं की जाती है। बागवान को बैरियर पर उद्यान कार्ड, प्रधान या पटवारी का सर्टिफिकेट, जमाबंदी, किसान विकास पत्र की छाया प्रति दिखानी होती है। बागवानों का आरोप है कि दस्तावेज दिखाने के बाद भी बैरियर पर तैनात कर्मचारी कुछ सुनने को तैयार नहीं। बागवानों को जवाब मिल रहा है कि सरकारी आदेश उनके पास नहीं हैं।
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प्रदेश से बाहर की मंडियों में बिक्री के लिए भेजे जा रहे सेब पर बागवानों से एपीएमसी तीन रुपये प्रति पेटी वसूल कर रहा है। बागवान हरी लाल चौहान, प्रमोद, सुरेंद्र सिंह, राजेश भागटा, प्रीतम चौहान ने कहा कि इस वसूली से बागवानों में रोष है।
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फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरीश चौहान का कहना है कि किसान-बागवानों से किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लिया जाता। इस मामले को पहले भी सरकार के ध्यान में लाया गया है। इस प्रकार की वसूली करने वालों पर एपीएमसी और सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।
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किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव संजय चौहान ने बताया कि मंडी समिति फीस के नाम पर अवैध वसूली एपीएमसी की मिलीभगत से हो रही है। ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने मामला विधानसभा में भी उठाया। इसके बाद भी अवैध वसूली नहीं रुक रही है। इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा जिन बागवानों से वसूल किए गए रुपये वापस किए जाने चाहिए।
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शिमला- किन्नौर विपणन समिति के अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा बागवानों से किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती है। बागवानों को एक दस्तावेज के बैरियर पर दिखाना होता है। उसके बाद भी यदि कोई कर्मचारी इस प्रकार की वसूली कर रहा तो कार्रवाई की जाएगी।
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