रोहडू। सेब के दामों में उछाल के बाद कई बागवानों ने कच्चे सेब का तुड़ान शुरू कर दिया है। दवाइयों से सेब को पकाने की जल्दबाजी भी बागवान कर रहे हैं। कच्चे सेब को मंडियों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे सेब के दाम गिर सकते हैं। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को सलाह दी है कि कच्चे सेब को न तोड़ें। इसके पकने के बाद ही मंडियों में पहुंचाएं। सेब सीजन शुरू होते ही स्पर किस्म के सेब की एक पेटी चार हजार रुपये तक बिकी है। मुनाफा कमाने के चक्कर में बागवानों ने कच्चे सेब को तोड़ना शुरू कर दिया है। कई क्षेत्रों में दवाइयों से सेब को पकाया जा रहा है। समय से पहले सेब को तैयार कर मंडियों में पहुंचाने की होड़ मच गई है। ये सेब बाहर से लाल और अंदर से कच्चा होता है। इससे सेब की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो जाते हैं। सेब खरीदार सरताब, आशीम, मोहित गुलशन ने बताया कि यहां की मंडियों से सेब खरीदकर मुंबई और कोलकाता ले जाते हैं। शुरू में स्पर सेब की अच्छी मांग के कारण उन्होंने मंहगे दाम पर भी सेब खरीदा। इसमें कुछ कच्चा सेब दस दिन बाद जब दूर की मंडियों में पहुंचाया। तो यह खराब हो चुका था। ऐसे मे नुकसान खरीदारों को झेलना पड़ा। इससे मंडियों में दाम गिरना भी स्वाभाविक हैं। उन्होंने कहा तैयार हुए सेब के मंडियों में हमेशा अच्छे दाम मिलते हैं। यदि खरीदारों को नुकसान होगा तो बागवानों को भी सेब के कम दाम मिलेगे।
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आढ़ती रविंद्र ठाकुर ने बताया कि बागवान ऊंचाई वाले वाले क्षेत्रों से रॉयल वैरायटी का सेब मंडियों में पहुंचा रहे हैं। ऊंचाई वाले वाले क्षेत्रों में सेब की फसल पंद्रह अगस्त के बाद ही अच्छी तरह तैयार होती है।
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अगली फसल पर पड़ेगा असर : डॉ. नरेंद्र
कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू के प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि बगवान कच्चा सेब मंडियों में न पहुंचाएं। कच्चे सेब के तुड़ान से बागवान और खरीदार दोनों को नुकसान होगा। इससे अगली साल की फसल पर भी प्रभाव पड़ता है। सेब पकने के बाद ही इसका तुड़ान करें। सेब अच्छा होगा तो दाम भी अच्छे मिलेंगे।