रोहडू। सेब के बगीचों में बिना मिट्टी की जांच किए उर्वरकों का प्रयोग पौधे के लिए घातक हो सकता है। आजकल सेब के बगीचों में मृदा परीक्षण का सही समय माना जाता है। अधिकांश बागवान मिट्टी की जांच के बिना उर्वरकों का प्रयोग करते रहे हैं। विशेषज्ञ की राय है कि जैविक या रसायनिक खादों का कम या अधिक प्रयोग पौधे के लिए घातक हो सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू के प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि अच्छी पैदावार के लिए दिसंबर से फरवरी के बीच बागवान सेब के बगीचों में हर साल खादों का प्रयोग करें। डॉ कायथ का कहना है कि अक्सर बागवान मिट्टी की जांच के बिना खादों का प्रयोग करते है। उन्होंने कहा कि पौधे में पौषक तत्व का संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यकता के अनुसार ही खादों का प्रयोग करें। अधिक या कम खादों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता खत्म हो जाती है। पौधें में भी पोषक तत्व का संतुलन खराब हो जाता है। उन्होंने कहा कि बागवानों को मिट्टी की जांच करवाने के बाद ही खादों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि बगीचे के अलग-अलग भाग से मिट्टी जांच के लिए निकाल कर जांच के लिए लैब में भेजें। उन्होंने कहा नमूने की मिट्टी को सूती थेली में भरें। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि मिट्टी परीक्षण के बाद ही बगीचों में खादों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा दिसंबर से फरवरी तक बगीचों में खाद डालने का उपयुक्त समय है।