रोहड़ू। सेब की फसल पर इस बार लगातार मौसम की मार पड़ रही है। सेब का आकार नहीं बढ़ पा रहा है। सेब की क्वालिटी पर असर पड़ रहा है। इससे बागवान परेशान हैं। अगस्त का आधा महीना निकल चुका है लेकिन अभी तक कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। हर साल जुलाई से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन शुरू हो जाता है, लेकिन इस साल अगस्त का आधा महीना बीतने के बाद भी सेब सीजन पूरी रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। पिछले साल की तुलना इस बार सेब की पैदावार भी बहुत कम है। सेब के फल को विकसित होने के लिए जुलाई और अगस्त में गर्मी और धूप की जरूरत रहती है। इस बार करीब एक महीने से अधिक का समय निकल गया है, सेब के फल और पौधों को प्रयाप्त धूप नहीं मिल रही। लगातार खराब मौसम के कारण बीमारियों बढ़ने और पत्तों के झड़ने के कारण फल का विकास भी बाधित हो रहा है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सेवानिवृत्त बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के विकास के लिए कम से कम दो महीने मौसम का साफ रहना जरूरी है। इस बार बहुत कम धूप पौधों को मिली, जिसके कारण फल का सही विकास नहीं हो सका। पत्तों में बीमारी के कारण भी अधिकांश बगीचों में फल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जहां पर बगीचों में पर्याप्त पत्तियां हैं वहां बागवान सेब का तुड़ान करें। कच्चा फल मंडियों में पहुंचने से बागवानों को इसके सही दाम नहीं मिलेंगे। इसलिए धीरे-धीरे सेब का तुड़ान करें।