-फल अपेक्षित आकार नहीं ले पाए, बागवानों को जल्दबाजी में फल तुड़ाई से बचने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में इस वर्ष सेब की पैदावार पहले से ही कम रहने का अनुमान था। खराब मौसम के कारण फलों के आकार और गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इससे अनुमानित उत्पादन में और कमी आने की आशंका जताई जा रही है।
बागवानों का कहना है कि सेब के बगीचों में फल अपेक्षित आकार नहीं ले पाए हैं। उनका रंग भी सामान्य वर्षों की तुलना में कम विकसित हुआ है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव ने फलों के समुचित विकास को प्रभावित किया है। अत्यधिक गर्मी और अनियमित वर्षा ने भी नुकसान पहुंचाया है। नमी की स्थिति ने भी फलों के विकास को प्रभावित किया है। फल का आकार छोटा रहने और रंग ठीक से विकसित न होने से बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना घट सकती है। अंतिम उत्पादन अनुमान पहले के आकलन से भी कम रह सकता है। यह स्थिति बागवानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी उषा शर्मा ने बागवानों को जल्दबाजी में फल तुड़ाई से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि केवल पूरी तरह परिपक्व फल ही तोड़े जाएं। कच्चे फलों की तुड़ाई से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है और मंडियों में अपेक्षित दाम नहीं मिलते। अच्छी तरह तैयार, रंग विकसित कर चुके और उचित आकार वाले फलों को अलग-अलग चरणों में तोड़कर बाजार में भेजना अधिक लाभदायक रहता है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि तुड़ाई के दौरान फलों की ग्रेडिंग और पैकिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए। खराब या कम गुणवत्ता वाले फलों को अलग छांटकर उच्च गुणवत्ता वाले फलों को मंडियों में भेजें। शुरुआती दौर में अच्छी तरह तैयार और उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले फलों की बाजार में मांग अधिक रहती है। इससे बागवानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में वैज्ञानिक सलाह का पालन और चरणबद्ध तुड़ाई इस चुनौतीपूर्ण मौसम में नुकसान कम करने का सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकता है।