जुब्बल की मांदल पंचायत में बागवानोंं की बेदखली के विरोध में लोगों के साथ सेब उत्पादक संघ के प
संघ ने लगाया विभाग पर उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का आरोप
25 फरवरी को हाटकोटी में होगा सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। उपमंडल जुब्बल की मांदल पंचायत में प्रस्तावित वनभूमि से बागवानों के खिलाफ बेदखली कार्रवाई का हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने कड़ा विरोध किया। संघ का आरोप है कि यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय के 16 दिसंबर 2025 के आदेशों की अवहेलना है। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ संघ की जिला शिमला, जुब्बल और रोहड़ू इकाइयों के प्रतिनिधि रमन थारटा, संजय कुमार, जय सिंह और नरेश कुमार समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। विरोध के बाद विभाग को कार्रवाई फिलहाल रोकनी पड़ी। संघ ने कहा कि सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप किसानों को जमीन देने की नीति बनानी चाहिए, लेकिन इसके बजाय राजस्व और वन विभाग बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाए बेदखली की कोशिश कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों के अनुसार 18 फरवरी को नोटिस केवल व्हाट्सएप के माध्यम से मिला और मात्र तीन दिन के भीतर 21 फरवरी को बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी गई। संघ ने यह भी आपत्ति जताई कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कार्रवाई किस कानून की किस धारा के तहत की जा रही है। मौके पर अधिकारियों से पूछे जाने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। संघ का आरोप है कि यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भावना के विपरीत है और वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। संघ ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार स्पष्ट नीति नहीं बनाती, इस तरह की त्वरित बेदखली न्यायसंगत नहीं है। अधिकारियों को अदालत के आदेश दिखाए जाने के बाद वे पुलिस बल सहित बिना कार्रवाई लौट गए। संघ ने 24 फरवरी को हाटकोटी में होने वाले सम्मेलन में शामिल होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की आवाज उठाने की अपील की है।
जुब्बल की मांदल पंचायत में बागवानोंं की बेदखली के विरोध में लोगों के साथ सेब उत्पादक संघ के प