चौपाल में बागवानों के साथ सेब के रोग की रोकथाम के लिए जानकारी सांझा करते विशेषज्ञ
.चौपाल में बागवान जागरूकता अभियान में विशेषज्ञों ने किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। ऊपरी शिमला क्षेत्र में सेब की बागवानी केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की जीवनरेखा है। इसे बीमारियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से चौपाल में बागवान जागरूकता शिविर लगा। शिविर में उद्यान विभाग और डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के विशेषज्ञों ने बागवानों को दवाइयों के इस्तेमाल और सेब के बगीचों को संक्रमण से बचाने के तरीके बताए। नौणी विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक टीम में शामिल डॉ. किरण, डॉ. तनुजा और डॉ. नीलम ने पंचायत स्तर पर पहुंचकर बागवानों की शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने विशेष रूप से आगाह किया कि कई बागवान जल्दबाजी में अलग-अलग दवाइयों और खादों को आपस में मिला देते हैं, जो पौधों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बिना सलाह के किया गया मिश्रण पौधों के लिए घातक बन सकता है। उद्यान विभाग की ओर से जारी स्प्रे शेड्यूल को अपनाने पर जोर देते हुए चौपाल के बागवानी विषय विशेषज्ञ सुरेंद्र जसटा ने बागवानों से निजी सलाह या दुकानदारों के बहकावे में न आने और विश्वविद्यालय की आधिकारिक हेल्पलाइन का उपयोग करने की अपील की। मडौग, बम्टा, चान्जू, माटल और ननहार पंचायतों में बागवानों ने अपनी समस्याएं सीधे वैज्ञानिकों के सामने रखीं। बागवानी विषय विशेषज्ञ चौपाल सुरेंद्र जसटा ने बताया कि असमय पत्तझड़ का सीधा असर पेड़ों की सेहत पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि इस समय वैज्ञानिक तरीके नहीं अपनाए गए तो नुकसान और बढ़ सकता है।