3.62 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी दिया आदेश
अपर सत्र न्यायाधीन ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के एक मामले में दोषी को निचली अदालत से मिली सजा को अपर सत्र न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने बरकरार रखा है। आरोपी अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रोहड़ू के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की थी। इस फैसले के तहत उसे आठ महीने की साधारण कारावास और 3.62 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। शिकायतकर्ता संजीत सेब कारोबारी है, जबकि आरोपी बसंत राज एक बागवान है। जुलाई-अगस्त 2019 में बसंत राज ने संजीत चौहान की दुकान से सामान खरीदा। सितंबर 2019 को 3,62,192.28 रुपये का बिल बकाया था। इस देनदारी को चुकाने के लिए बसंत राज ने 3.62 रुपये का एक चेक जारी किया। यह चेक बाउंस हो गया। फिर आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन उसने भुगतान नहीं किया। अपर सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अदालत ने पाया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने से इन्कार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी को ठोस सबूतों से देनदारी का खंडन करना होता है। बसंत राज ऐसा कोई संभावित बचाव पेश करने में विफल रहा। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता ने आरोपी की कानूनी देनदारी को साबित कर दिया है। इन तथ्यों के आधार पर निचली अदालत की ओर से बसंत राज को दोषी ठहराना सही था। उसकी सजा को बरकरार रखा गया है और उसे निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया।