फल के साथ साथ पेड़ का बीमा, फूल और पत्तियां भी रहेंगी सुरक्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर/नित्थर। सूबे के ऊंचाई वाले सेब बाहुल क्षेत्रों ने इन दिनों सफेद चादर ओढ़ ली है। क्षेत्र के बागवान इन दिनों ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एंटी हेलनेट बिछाने में कार्य में जुटे हुए हैं। आगामी सीजन के लिए ऊंचाई वाले इलाकों में बागवानों ने सेब के बगीचों को ओलों से बचाने की कवायद शुरू कर दी है। एंटी हेलनेट बिछाने से सेब के फलों के साथ साथ पेड़ का बीमा, फूल और पत्तियां भी सुरक्षित रहेंगी। सूबे के एडशी, बुआई, ढहमा, तांदी, थलीन और केउरी क्षेत्र में बागवान सेब बगीचों में हेलनेट बिछा रहे हैं। ऊंचाई पर होने वाले क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि से सेब के बगीचों को बचाव के लिए अब बागवान सतर्क हो गए हैं। बागवान इन दिनों ओलावृष्टि के खतरे से बगीचे में बचाव के कार्य में जोरों-शोरों से जुटे हैं। वहीं, नित्थर के सेब बाहुल क्षेत्र दूराह, लोट, कुठेड़, कटार, और कंडागई सहित अन्य क्षेत्रों में हेलनेट लगने से पूरी वादियां भी खूबसूरत दिखने लगी हैं। एडशी के बागवान सिकंदर ठाकुर, ढहमा के सुनील भारती, हुकम चंद, होशियार चंद, बबली, गोपाल, चिंटू ठाकुर, इंद्रजीत कायथ, सुनील चौहान सहित अन्य बागवानों ने कहा कि ओलों से सेब के पेड़ों को बचाने का कार्य इन दिनों जोर-शोर से चला है। हेलनेट लगाने से सेब सेटिंग अच्छी होती है। मौसम के खराब होने से नेट के नीचे पौधे में तापमान में उतनी गिरावट नहीं आती, जितने की खुले पेड़ में आती है। उन्होंने बताया कि नेट लगाने से जहां एक ओर सेब के पेड़ का बीमा सुरक्षित रहता है, वहीं नेट के नीचे फूल भी स्वस्थ और सुरक्षित रहते हैं। इससे ओलावृष्टि के बचाव से सेब के फल और पत्तियां भी सुरक्षित रहती हैं, इसलिए बागवानों को बगीचे में हेलनेट लगवानी चाहिए।
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ऊंचाई वाले सेब बाहुल क्षेत्रों में एंटी हेलनेट बिछाने में जुटे बागवान