संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ ने नए नियमों को निरस्त करने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ जिला शिमला के पदाधिकारियों की बैठक राेहड़ू में हुई। बैठक में शास्त्री भर्ती के नए नियमों के खिलाफ रोष व्यक्त किया गया। संघ के मीडिया प्रभारी चमन शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने दो माह पहले ही शास्त्री भर्ती में अचानक एनसीटीई के नए नियमों को लागू किया है। इससे संघ में भारी रोष है। एनसीटीई के नियम लागू करने से जहां हजारों की संख्या में शास्त्री डिग्री धारक बाहर हो रहे हैं, वहीं प्रदेश सरकार एमए, बीए, बीएड पास अभ्यर्थी जिन्हाेंने संस्कृत का केवल एक विषय वैकल्पिक विषय के रूप से पढ़ा है, उन्हें शास्त्री भर्ती के लिए योग्य माना है जोकि एक विडंबना है। जिन शास्त्री डिग्री धारकों ने संस्कृत महाविद्यालय में जाकर पांच साल तक व्याकरण, ज्योतिष शास्त्र, दर्शनशास्त्र, साहित्य शास्त्र, योगशास्त्र, कर्मकांड आदि ग्रंथों का अध्ययन किया है, उन्हें शास्त्री भर्ती से बाहर रखा जा रहा है। नए नियमों में सरकार की ओर से शास्त्रियों को बीएड डिग्री जरूरी की गई है जोकि पहले नहीं थी। सरकार को यह मालूम होना चाहिए कि हिमाचल में ऐसा कोई भी संस्थान नहीं है जहां से शास्त्री बीएड कर सकें। इसके बावजूद भी सरकार शास्त्री के 193 पदों पर बैचवाइज भर्ती करवाकर उलझाने का काम कर रही है। शास्त्री बैचवाइज भर्ती में जहां वर्ष 2010 तक के अभ्यर्थियों को बुलाया जाना था, वहीं अब नए नियम लगाकर वर्ष 2023 तक के अभ्यर्थियों को बुलाया जा रहा है। इससे हिमाचल के हजारों शास्त्री डिग्रीधारक बाहर हो गए हैं। उन्होंने मांग उठाई है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू नए नियमों को शीघ्र निरस्त करें। पुराने नियमों से ही शास्त्री भर्ती की जाए। इस मौके पर महासचिव जयचंद कलवान, सलाहकार सनी नारटा, सुनील शर्मा, राजिंद्र दुगलेट, रवि फोल्टा, मनीष शर्मा, विक्रांत शर्मा, रंजना,सुनिता, आरती शर्मा, कृष्णा उपस्थित रहे।