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आंखों की रोशनी नहीं, हौसले ने दिखाई राह: अंगमो नेगी ने पूरी की देश की सबसे कठिन 77 किमी हाई एल्टीट्यूड मैराथन

Sun, 30 Aug 2026 11:15 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर/काजा (लाहौल स्पीति।

सार

किन्नौर के चांगों गांव की अंगमो नेगी ने स्पीति घाटी में 77 किलोमीटर लंबी हाई एल्टीट्यूड मैराथन पूरी कर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत कुंजुम टॉप से काजा तक यह दौड़ आयोजित की थी। कठिन पहाड़ी रास्ते, ऊंचाई और बर्फीले तूफान के बावजूद अंगमो ने दौड़ पूरी की। इससे पहले वह माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली भारत की पहली दृष्टिबाधित महिला पर्वतारोही बनी थीं।
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अंगमो नेगी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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किन्नौर के दुर्गम चांगों गांव की अंगमो नेगी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस से एक बार फिर असंभव को संभव कर दिखाया है। आंखों की रोशनी न होने के बावजूद उन्होंने स्पीति घाटी में आयोजित 77 किलोमीटर लंबी हाई एल्टीट्यूड मैराथन सफलतापूर्वक पूरी की।

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माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर भारत की पहली दृष्टिबाधित महिला पर्वतारोही बनने के बाद अंगमो नेगी ने अब देश की सबसे चुनौतीपूर्ण ऊंचाई वाली मैराथन में अपनी क्षमता साबित की है। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय सेना ने भी विशेष रूप से सम्मानित किया।

कुंजुम टॉप से काजा तक 77 किलोमीटर की दौड़
भारतीय सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत 28 अगस्त को कुंजुम टॉप से काजा तक सूर्य स्पीति चैलेंज मैराथन का आयोजन किया था। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर हुई इस दौड़ में प्रतिभागियों को बेहद कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
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दौड़ के रास्ते में पथरीले और दुर्गम ट्रैक, खड़ी चढ़ाई और बर्फीले तूफान जैसी चुनौतियां सामने आईं। ऐसी परिस्थितियों के बीच दृष्टिबाधित अंगमो नेगी का 77 किलोमीटर का सफर पूरा करना उनकी असाधारण शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती को दर्शाता है।

एवरेस्ट के बाद फिर साबित किया जज्बा
अंगमो नेगी इससे पहले भी पर्वतारोहण की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। 28 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। इस उपलब्धि के साथ वह भारत की पहली दृष्टिबाधित महिला पर्वतारोही बनी थीं। अब हाई एल्टीट्यूड मैराथन पूरी करके उन्होंने एक बार फिर साबित किया है कि शारीरिक चुनौतियां मजबूत इच्छाशक्ति के सामने बाधा नहीं बन सकतीं।

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भारतीय सेना ने किया सम्मानित
77 किलोमीटर की मैराथन पूरी करने के बाद भारतीय सेना की ओर से अंगमो नेगी को विशेष सम्मान दिया गया। उनकी उपलब्धि ने प्रतियोगिता में शामिल अन्य प्रतिभागियों के साथ स्थानीय लोगों का भी उत्साह बढ़ाया।

1,532 धावकों ने लिया हिस्सा
सूर्य स्पीति चैलेंज मैराथन में कुल 1,532 धावकों ने भाग लिया। इनमें करीब 800 स्थानीय प्रतिभागी, 700 भारतीय सेना के जवान और देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे 32 एलीट धावक शामिल थे।

तेनजिन डोलमा और नायक हेत राम बने चैंपियन
77 किलोमीटर की दौड़ के महिला वर्ग में स्पीति घाटी की तेनजिन डोलमा ने पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने यह दूरी करीब छह घंटे में पूरी की। तेनजिन ने वर्ष 2024 में आयोजित 77 किलोमीटर स्पीति एवेंजर्स चैलेंज में भी महिला वर्ग में प्रथम स्थान हासिल किया था। पुरुष वर्ग में भारतीय सेना के नायक हेत राम विजेता बने।
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