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पीरियड आधार पर गेस्ट टीचर भर्ती नहीं न्याय संगत : महासंघ

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संवाद न्यूज एजेंसी
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चौपाल (रोहड़ू) । पीरियड आधार पर गेस्ट टीचर रखना न्याय संगत ही नहीं है, बल्कि प्रदेश के लाखों शिक्षित युवाओं और बेरोजगारों के साथ धोखा है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जिला सिरमौर इकाई के अध्यक्ष कपिल मोहन ठाकुर, जिला महामंत्री दीपक त्रिपाठी, जिला संगठन मंत्री श्यामलाल भटनागर, प्रांत उपाध्यक्ष विजय कंवर, ऋषिपाल शर्मा, प्रांत प्रतिनिधि मामराज चौधरी, प्रांत सचिव सीएंडवी यशपाल शर्मा, रत्न लाल शर्मा, शिवानी शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष रोहित कुमार, जिला उपाध्यक्ष राधेश्याम शास्त्री, बलदेव सिंह, देवेंद्र शर्मा, ओंकार शर्मा और चमेल सिंह आदि पदाधिकारियों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था का मूलभूत ढांचा ही चरमरा गया है। जिस गुरु को हमारा समाज सर्वोच्च सम्मान देता रहा है, उसकी हैसियत शिक्षण व्यवस्था में एक गेस्ट की ही रह गई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में सरकार ने पहले ही एसएमसी, कंप्यूटर टीचर, वोकेशनल, आउटसोर्स और न जाने कितने ही वर्गों में अध्यापकों को विभाजित किया गया है, जो अपने भविष्य की राह देख रहे हैं। कुछ अध्यापक तो पिछले 20 से 25 वर्षों से नियमितीकरण के लिए पॉलिसी का इंतजार कर रहे हैं । इस ओर सरकार के कोई प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। प्रशिक्षित बेरोजगारों का एक ऐसा बड़ा वर्ग रेगुलर नियुक्तियों पर निगाहें टिकाए बैठा है, लेकिन उनकी आवाज सरकार तक नहीं पहुंच पा रही है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर कभी भी इस तरह की नियुक्तियों के पक्षधर नहीं रहे हैं, लेकिन गेस्ट टीचर पॉलिसी पर निर्णय क्यों लिया गया, यह सोचने वाला विषय है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जिला सिरमौर इकाई इसका पुरजोर विरोध करती है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जिला सिरमौर के जिला अध्यक्ष कपिल मोहन ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में पहले ही एस एम सी पर शिक्षकों की नियुक्तियां की गई हैं। इनके लिए अभी तक सरकार ने कोई ठोस पॉलिसी नहीं बनाई है, जबकि इनमें बहुत सारे लोगों को 12 वर्षों से ज्यादा का लंबा समय हो गया है। यह अध्यापक बहुत कम वेतन में दूरदराज के क्षेत्रों में जिन विद्यालयों में नियमित शिक्षक जाने से गुरेज करते हैं, उन विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। जो गेस्ट टीचर पॉलिसी सरकार की ओर से लाई जा रही है, उनका वेतनमान सरकार की ओर से प्राइमरी स्कूलों में गेस्ट टीचर को 200 रुपये प्रति पीरियड, अप्पर प्राइमरी में 250 रुपये, उच्च विद्यालय में 400 रुपये और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 550 रुपये प्रति पीरियड के हिसाब से दिया जाएगा। कपिल मोहन ठाकुर ने कहा कि उदाहरण के तौर पर अगर एक मिडिल स्कूल के अध्यापक जो विज्ञान और गणित पढ़ाते हैं, उनके छह पीरियड बनते है। यानी एक दिन के 250 रुपये के हिसाब से 25 दिन का उनको 37500 जो एक रेगुलर अध्यापक जो कांटेक्ट के बराबर तनख्वाह होती हैं। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जिला सिरमौर इकाई के अध्यक्ष कपिल मोहन ठाकुर ने सरकार से नियमित भर्ती करने की मांग करते हुए कहा कि इस प्रकार की भर्ती प्रदेश के युवाओं के साथ धोखा है। सरकार को पहले पिछली की गई सभी नियुक्तियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित किया जाना चाहिए और नई नियुक्तियां पारदर्शी पॉलिसी में सभी को सम्मान अवसर देने चाहिए, ताकि प्रदेश के सभी बेरोजगारों और शिक्षार्थियों को लाभ मिले। सरकार को गेस्ट टीचर पॉलिसी पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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