उद्यान प्रसार केंद्रों में उच्च गुणवत्ता के पौधे मौजूद, आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठक बागवान
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब की फसल के लिए अभी पर्याप्त बारिश व बर्फबारी नहीं हो पाई है। इस कारण बागवानों ने सेब के नए पौधे लगाने का काम रोक दिया है। उद्यान प्रसार केंद्रों में सेब के पौधों की बिक्री नहीं हो रही है। ऐसे में बागवानी विभाग को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने से जमीन में सेब के पौधों के मुताबिक नमी नहीं है। हालांकि, कई बागवानों ने नई पौध लगाने के लिए गड्ढे बना लिए हैंं और आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। मौसम में लगातार बदलाव के कारण सेब बागवानी पर संकट छाया हुआ है। बर्फबारी की संभावना को देखते हुए नवंबर और दिसंबर में बागवानों की मांग पर उद्यान विभाग ने उच्च गुणवत्ता के पौधे केंद्रों में पहुंचाए हैं। इसमें वेलॉक्स, सुपर चीफ, गेल गाला, एम्ब्रोसिया, किंग रोट, डार्क बैरन माला, रेडलम गाला, गेल गाला, बेगेंट गाला, बक आई गाला, जेरोमाइन, रेड, शलेक्ट स्पर, चेलन स्पर, स्कार्लेट स्पर-11, ओरेगॉन स्पर-11, रॉयल डिलीशियस, ब्रुक फील्ड गाला, गालावल, गाला शिनगा श्निको, गाला सिमंस, अर्ली रेड वन, रॉयल रेड हनी क्रिस्प, गाला वीनस फेंगल, गाला अल्टिमा, औविल अलौ फूजी, एटेक फूजी, रेड कैमियो, अन्ना, रेड फूजी, सन फूजी, पिंक लेडी, सेप्टन बंडर, गिब्सन गोल्डन, गोल्डन डेल, जिंजर गोल्ड और ग्रेनी स्मिथ आदि किस्में हैं।
विशेषज्ञ की माने तो स्पर प्रजाती रूट स्टाक के लिए पर्याप्त नमी की जरूरत रहती है। सीडलिंग पर तैयार पौधे लगाने के लिए भी अभी भूमि में पूरी नमी उपलब्ध नहीं है, इसलिए पंजीकृत नर्सरी में भी सेब के हजारों पौधे बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। कई लोगों ने प्रदेश के बाहर से सस्ती नर्सरी से सेब व अन्य पौधों के स्टाक मंगवाए हैं। यदि बारिश समय पर नहीं होती तो उनके खराब होने की पूरी संभावना है। रोहड़ू-जुब्बल सहित उद्यान विभाग के केंद्रों में अभी पहले से मंगवाए गए पौधों के स्टाक भरे पड़े हैं।
बागवान तैयार किए गए गड्ढों को मिट्टी से भरकर रखें। बारिश होने के बाद उसमें तुरंत पौधे लगाने का काम शुरू करें। निचले क्षेत्रों में फरवरी के अंत तक नए पौधे लगाने का उचित समय रहता है। यदि पानी उपलब्ध हो तो बागवान पौधे लगाने के बाद उसमें सिंचाई कर सकते हैं।
- डाॅ. नरेंद्र कायथ, बागवानी विशेषज्ञ