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Rampur Bushahar News: जिले में जमा दो के बाद अब दसवीं के रिजल्ट में भी पिछड़े सरकारी स्कूल

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जिले के निजी स्कूलों से आठ विद्यार्थी टॉप 10 में शामिल, सरकारी स्कूल का एक भी विद्यार्थी मेरिट में नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित दसवीं कक्षा के परीक्षा परिणामों ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है। जमा दो के नतीजों में पिछड़ने के बाद अब दसवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम भी सरकारी स्कूलों के लिए चिंताजनक रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस बार जिले के सरकारी स्कूलों का एक भी विद्यार्थी मेरिट यानी टॉप 10 की लिस्ट में अपनी जगह नहीं बना सका है। जहां निजी स्कूल अपनी बेहतरीन परफॉरमेंस का जश्न मना रहे हैं, वहीं सरकारी स्कूलों के हिस्से केवल मायूसी हाथ लगी है। जिले के परीक्षा परिणामों में निजी स्कूलों ने अपनी बादशाहत कायम रखी है। टॉप 10 की सूची में जिले के निजी स्कूलों के कुल आठ विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त किया है। विशेष रूप से बीबीएन क्षेत्र के स्कूलों का दबदबा देखने को मिला है, जहां से सबसे अधिक मेधावी छात्र उभरकर सामने आए हैं।
जमा दो के परीक्षा परिणाम में छात्राओं ने बचाई थी साख
इससे पहले घोषित हुए जमा दो के परीक्षा परिणामों में भी सरकारी स्कूलों की हालत पतली ही थी। हालांकि, उस समय कन्या स्कूल की दो छात्राओं ने मेरिट सूची में स्थान पाकर सरकारी स्कूलों की साख किसी तरह बचा ली थी, लेकिन दसवीं के नतीजों ने शिक्षा विभाग की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
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सरकारी स्कूलों को पिछड़ना गंभीर विषय
सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे और शिक्षकों पर होने वाले भारी खर्च के बावजूद निजी स्कूलों के मुकाबले पिछड़ना एक गंभीर विषय है। अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में यह खाई और अधिक बढ़ सकती है।
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अभिभावक उठा चुके हैं सवाल
सरकारी स्कूलों में रिजल्ट खराब आने का एक कारण यह भी है कि कई सरकारी स्कूलों में अपनी पहुंच से शिक्षक सालों से डटे हुए हैं। बीते दिनों दून विस क्षेत्र के घरेड़ स्कूल में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां पर 12वीं में मात्र 24 बच्चों में से आधे ही बच्चे पास हो पाए थे और अभिभावकों ने सवाल उठाया था कि पांच शिक्षक इस स्कूल में 15 सालों से डटे हुए हैं।
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