शादी से इन्कार करने पर लड़की के घर को आग लगाने वाले आरोपी युवक को जमानत नहीं मिली है। रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किन्नौर की अदालत ने आरोपी की प्रवृत्ति और गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह घटना उपमंडल आनी के एक गांव में पिछले महीने हुई थी। सिरमौर के शिलाई क्षेत्र का आरोपी पंकज अभी न्यायिक हिरासत में है। अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध किया और बताया कि 20 फरवरी की रात को जब शिकायतकर्ता यानी लड़की का पिता अपने परिवार के सदस्यों के साथ घर में सो रहा था, तो पड़ोसियों ने शोर मचाया कि घर में आग लग गई है।
इसी बीच आरोपी अपने वाहन में बैठकर मौके से भाग गया। आग से देवदार की लकड़ियां, सेब के बॉक्स, प्लास्टिक के डिब्बे और घर की अन्य वस्तुओं के साथ बिजली की वायरिंग और मीटर जल गए। शिकायतकर्ता को मौके से पेट्रोल की गंध भी आई। शिकायतकर्ता के अनुसार, लगभग दो दिन पहले आरोपी ने उसे धमकी दी थी कि यदि वह उसे अपनी बेटी से शादी करने की अनुमति नहीं देगा, तो वह आग लगाकर उन्हें मार डालेगा। आरोपी को पुलिस ने लूहरी चौक के पास गिरफ्तार कर लिया। अभियोजन पक्ष ने बताया कि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह गवाहों को धमका सकता है।
उधर, लड़की ने पुलिस थाना आनी में आरोपी के खिलाफ पहले भी शिकायत दर्ज करवाई थी, जिस पर भी आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है। अदालत ने जमानत याचिका पर फैसला देते हुए टिप्पणी की है कि यह ऐसा मामला नहीं है, जहां आरोपी के पक्ष में जमानत देने के अपने विवेकाधिकार का उपयोग किया जा सके। पुलिस रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी शिकायतकर्ता और उसकी बेटी पर उससे शादी करने का दबाव डाल रहा है। उन्हें मजबूर करने के लिए वह कई तरह के हथकंडे अपना रहा है, जिसमें उन्हें धमकाना भी शामिल है।
यह भी स्पष्ट है कि आरोपी के खिलाफ दोनों एफआईआर पुलिस थाना आनी में एक महीने के भीतर ही दर्ज की गई हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी लगातार शिकायतकर्ता और उसके परिवार वालों को, विशेष रूप से उसकी बेटी को, परेशान कर रहा है। इन परिस्थितियों में यदि उसे जमानत दे दी जाती है, तो इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को धमकाएगा नहीं। वर्तमान मामले में आरोप की प्रवृत्ति और सजा की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए न्यायालय का यह मत है कि आरोपी को जमानत पर रिहा करने का विवेकाधिकार उसके पक्ष में उपयोग नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कारणों से, यह न्यायालय आवेदक को जमानत देने के पक्ष में नहीं है।