निचली अदालत ने डेढ साल का कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया है
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
विशेष सत्र न्यायालय रोहड़ू ने बैंक ऋण धोखाधड़ी के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी अजय कुमार की आपराधिक अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार, 3 मई 2012 को भारतीय स्टेट बैंक की कुटाड़ा शाखा के प्रबंधक ने पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में कहा गया था कि अजय कुमार ने अपनी भूमि पर किसान क्रेडिट कार्ड सीमा स्वीकृत करवाई थी। यह सीमा पहले 1.80 लाख रुपये थी, जिसे वर्ष 2010 में बढ़ाकर 2.90 लाख रुपये किया गया। आरोपी ने इसी भूमि पर 19 अप्रैल 2010 को 15 लाख रुपये का मकान निर्माण ऋण भी लिया था। उस पर किसान क्रेडिट कार्ड का 1,57,166 रुपये और मकान ऋण का 17,48,028 रुपये ब्याज सहित बकाया था। आरोप है कि ऋण बकाया होने के बावजूद अजय कुमार ने बैंक का जाली अनापत्ति प्रमाणपत्र तैयार किया। उसने 20 नवंबर 2011 को राजस्व रिकॉर्ड से बैंक के रहन की प्रविष्टि हटवा दी। इसके बाद 21 दिसंबर 2011 को उसने यह भूमि प्रेम चंद को नौ लाख रुपये में बेच दी। यह बिक्री रजिस्ट्री संख्या 267/2011 के माध्यम से की गई थी। मामले की जांच तत्कालीन सहायक उपनिरीक्षक ने की थी। जांच पूरी होने पर अजय कुमार के खिलाफ निचली अदालत में चालान पेश किया गया। निचली अदालत ने 1 अक्तूबर 2020 को अजय कुमार को दोषी ठहराया था। उसे प्रत्येक धारा में डेढ़ साल का कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना सुनाया गया था। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में तीन माह के अतिरिक्त कठोर कारावास का प्रावधान था। आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ विशेष सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।