असिस्टेंट कलेक्टर की ओर से अनुमोदित होने के बाद ही सीमांकन रिपोर्ट अंतिम मानी जाएगी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित विशेष न्यायाधीश-II की अदालत ने अफीम की खेती करने के मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ बिना किसी उचित संदेह के अपना मामला साबित करने में विफल रहा। यह मामला 8 मई 2021 को कुल्लू जिले के निरमंड पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। पुलिस ने टिंडर गांव में एक खेत से 500 अफीम के पौधे बरामद किए थे। पुलिस ने आरोप लगाया था कि ये पौधे तेज राम की ओर से उगाए गए थे। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले को साबित करने के लिए 15 गवाहों से पूछताछ की। इनमें पुलिस टीम के सदस्य भी शामिल थे, जो मौके पर पहुंचे थे। हालांकि, जिरह के दौरान इन सरकारी गवाहों ने विवादित खेत पर आरोपी के कब्जे या अफीम की खेती के बारे में निजी जानकारी होने से इन्कार किया। उन्होंने यह भी माना कि गांव के किसी व्यक्ति ने उन्हें खेत के मालिक या खेती करने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। पुलिस की ओर से वार्ड सदस्य से भी पूछताछ नहीं की गई। अदालत ने पाया कि पुलिस गवाहों को घटना स्थल पर खेत के कब्जे के बारे में कोई निजी जानकारी नहीं थी। अभियोजन पक्ष ने आरोपी की ओर से खेती साबित करने के लिए राजस्व रिकॉर्ड और सह-मालिकों के हलफनामों पर भरोसा किया। राजस्व रिकॉर्ड से पता चला कि खेत के कई सह-मालिक थे, जिनमें आरोपी भी शामिल था। अन्य सह-मालिकों ने हलफनामे दिए थे कि पारिवारिक बंटवारे में खेत आरोपी को खेती के लिए दिया गया था। हालांकि, जब इन गवाहों से जिरह की गई, तो उन्होंने अपने हलफनामों की सामग्री से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि खेत पर खेती कौन करता है और उन्होंने पुलिस के कहने पर बिना पढ़े हलफनामों पर हस्ताक्षर किए थे। अदालत ने इन हलफनामों को अविश्वसनीय और सबूत के तौर पर अस्वीकार्य माना, क्योंकि वे जांच के दौरान पुलिस को दिए गए बयान थे।अभियोजन पक्ष ने सीमांकन रिपोर्ट भी पेश की थी, लेकिन अदालत ने इसे भी अविश्वसनीय पाया। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के स्थापित कानून के अनुसार, कानूनगो की ओर से तैयार की गई सीमांकन रिपोर्ट तब तक अंतिम नहीं मानी जाती, जब तक उसे असिस्टेंट कलेक्टर (फर्स्ट ग्रेड या सेकंड ग्रेड) की ओर से अनुमोदित न किया जाए। इस मामले में, रिपोर्ट को किसी वरिष्ठ राजस्व अधिकारी ने अनुमोदित नहीं किया था। पटवारी ने जिरह में बताया कि सीमांकन के समय खेत पर कोई फसल नहीं थी। इससे खेत की सही पहचान पर सवाल उठे। सीमांकन के लिए गए पुलिस अधिकारी भी प्रारंभिक बरामदगी टीम का हिस्सा नहीं थे, जिससे उन्हें खेत की सटीक पहचान की व्यक्तिगत जानकारी नहीं थी। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी ने ही अफीम के पौधे उगाए थे। आरोपी का खेत पर कब्जा या खेती साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत नहीं था। संदेह का लाभ आरोपी को देते हुए, अदालत ने तेज राम को एनडीपीएस एक्ट की धारा 18 के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया।