. विशेष न्यायाधीश-II किन्नौर की अदालत ने दिया फैसला
चिट्टे के मामले में आरोपी के खाते को डीफ्रीज करने का दिया आदेश
प्रकाश ठाकुर
रामपुर बुशहर।
सक्षम अथॉरिटी के आदेश के बिना एनडीपीएस एक्ट में आरोपी का बैंक खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश-II किन्नौर की अदालत ने सुनाया है। दरअसल, रामपुर थाना पुलिस ने पिछले साल दर्ज किए चिट्टे के मामले की जांच के दौरान एक व्यक्ति के बैंक खाते में आरोपियों के साथ संदिग्ध लेनदेन पाया। पुलिस ने उस व्यक्ति को भी सह आरोपी बनाया और उसका बैंक खाता फ्रीज करवाया। आरोपी मोहिंद्र सिंह ने बैंक खाते को डीफ्रीज करने के लिए एक आवेदन किया। आवेदन में बताया कि बैंक खाते में पड़ी धनराशि सेब की फसलों की बिक्री से संबंधित है। उसके पिता एक भवन के मालिक हैं। किरायेदार भी ऑनलाइन माध्यम से इस खाते में अपना किराया भेजते हैं। आवेदक को अपनी जरूरतों के लिए पैसे की आवश्यकता है। उसे सिर्फ इस केस के आधार पर अपनी कमाई से वंचित कर दिया गया है, जबकि आवेदक के पास से कोई चिट्टा (हेरोइन) बरामद नहीं हुआ। उसे सिर्फ शक के आधार पर केस में फंसाया गया है। दूसरी और अभियोजन पक्ष ने केस के तथ्यों को पेश करके अदालत में जवाब दिया। कहा गया कि आरोपी मोहेंद्र सिंह के बैंक रिकॉर्ड से यह साफ है कि उसका तीन सह आरोपियों के साथ बैंक ट्रांजेक्शन था। आरोपी ने इस पैसे का इस्तेमाल चिट्टा (हेरोइन) की बिक्री और खरीद के लिए किया है, इसलिए प्रार्थना की जाती है कि आवेदन को खारिज कर दिया जाए। अदालत ने फैसला दिया कि यह साफ है कि खाते में तीन सह आरोपियों के अकाउंट से कुछ रकम क्रेडिट व डेबिट दिखाई गई है। हालांकि, आज तक आरोपी के अकाउंट के बारे में कोई फाइनेंशियल जांच शुरू नहीं की है। इन हालात में, अदालत का मानना है कि एनडीपीएस एक्ट के तहत सक्षम अथॉरिटी के आदेश के बिना आरोपी का अकाउंट एकतरफा फ्रीज नहीं किया जा सकता, इसलिए यह आवेदन मंजूर किया जाता है। खाते को कोर्ट की संतुष्टि के लिए तीन लाख के हर्जाने के बांड पर डीफ्रीज करने का आदेश दिया जाता है। इस ऑर्डर की सर्टिफाइड कॉपी दिखाने पर, संबंधित थाना प्रभारी को इसका पालन करने के लिए जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाता है। संवाद