हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)। साल 1980 में आनी एक छोटा सा कस्बा हुआ करता था, जहां केवल चार दुकानें थीं। इनमें एक किराना की सादी दुकान, कपड़े की एक दुकान, एक दवाइयों की दुकान और एक छोटा होटल शामिल था। समय के साथ आनी ने ऐसा विकास किया कि अब यह 400 से ज्यादा दुकानों वाला एक समृद्ध बाजार बन चुका है। अस्सी दशक में लूहरी में सतलुज नदी पर एक छोटी सी पुलिया थी, जिससे सिर्फ छोटे वाहन ही गुजर सकते थे। बाजार तक जरूरी सामान इन्हीं वाहनों के माध्यम से पहुंचाया जाता था। इसमें अधिकतर खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान होता था। बड़े सामान के लिए लोगों को रामपुर या शिमला जाना पड़ता था। अब पुलिया की जगह मजबूत संपर्क मार्ग और बड़ी सड़कों ने ले ली है, जिससे बड़े वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है और आनी में हर प्रकार का सामान आसानी से पहुंचने लगा है। वर्तमान में आनी न केवल पारंपरिक व्यापार का केंद्र बन चुका है, बल्कि डिजिटल युग में भी कदम रखते हुए ऑनलाइन ऑर्डर और होम डिलीवरी जैसी सुविधाएं भी यहां के उपभोक्ताओं को उपलब्ध हो रही है।
कारोबारियों ने कहा
-आनी के वरिष्ठ व्यापारी ज्ञान शर्मा बताते हैं कि उन्होंने 44 साल पहले जब व्यापार शुरू किया था, तब सिर्फ चार दुकानें हुआ करती थीं। आज आनी में हर तरह के व्यवसायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं। कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, फर्नीचर, दवाइयों से लेकर डिजिटल सेवाएं तक अब आनी में उपलब्ध हैं।
- पिछले 40 वर्षों से आनी में दवाइयों की दुकान चला रहे व्यापार मंडल के अध्यक्ष विनोद चंदेल ने कहा कि उन्होंने जब कारोबार शुरू किया था, तब बाजार में करीब 20 दुकानें थीं। आज ये संख्या 400 से अधिक हो चुकी है। क्षेत्र के उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता वाला सामान अच्छे दामों में उपलब्ध करवाना उनकी प्राथमिकता है।
36 वर्षों से व्यापार कर रहे व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष फकीर चंद वर्मा कहते हैं कि पहले आनी के लोगों को रोजमर्रा के जरूरत का सामान भी शिमला या रामपुर से लाना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। आनी के व्यापारी उपभोक्ताओं को अच्छा सामान उचित दामों पर उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
फकीर चंद वर्मा उपाध्यक्ष व्यापार मंडल आनी
फकीर चंद वर्मा उपाध्यक्ष व्यापार मंडल आनी
फकीर चंद वर्मा उपाध्यक्ष व्यापार मंडल आनी