रामपुर बुशहर। भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की हार के बाद पार्टी के कई जीते उम्मीदवारों के मनसूूबों पर पानी फिर गया है। धूमल के करीबी माने जाने वाले जो प्रत्याशी इस बार चुनाव में जीत दर्ज करवा चुके हैं, उनको धूमल की हार से करारा झटका लगा है। जिला शिमला से भाजपा ने तीन सीटें जीती हैं। इस बार जिला शिमला से कौन मंत्री बन पाएगा, यह सवाल प्रमुखता से उठने लगा है। देखना यह है कि भाजपा सरकार में अबकी बार अपर शिमला से या फिर शिमला शहरी से मंत्री बनेगा। शिमला शहरी से भाजपा सरकार ने कभी मंत्री नहीं बनाया है।
भाजपा के जीतने के बाद क्या कोई शिमला जिले से मंत्री बनेगा इस पर खूब चर्चा हो रही है। हालांकि कांग्रेस सरकार के सत्ता में रहते हुए मुख्यमंत्री पद के साथ एक मंत्री पद भी जिला शिमला के पास रहा है। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भले ही भाजपा को सत्ता सौंपी जानी है पर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के हारने के बाद उनके गुट के जीते नेताओं को झटका लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री धूमल ने जिला शिमला में अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। हाईकमान ने चुनाव से ठीक पहले जैसे ही धूमल को भाजपा के मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया था तो उनके समर्थक उम्मीदवारों के हौसले काफी बुलंद थे। उन्होंने चुनाव जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। जिला शिमला के जुब्बल-कोटखाई से नरेंद्र बरागटा, चौपाल से बलवीर वर्मा और शिमला शहरी से सुरेश भारद्वाज सीट निकालने में कामयाब रहे। धूमल के चुनाव हारने से भाजपा के इन जीते उम्मीदवारों का गणित काफी गड़बड़ाया है। सवाल यह उठने लगा है कि क्या धूमल हारने के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं। पूर्व धूमल सरकार में जुब्बल-कोटखई से चुनाव जीतकर आने वाले नेता मंत्री पद झटकने में कामयाब रहे। पूर्व शांता सरकार के समय चौपाल से मंत्री दिया गया था। एक बात तो साफ है कि भाजपा सरकार में जिला शिमला से एक ही मंत्री बनाया जाता रहा है।
कांग्रेस शासन में मुख्यमंत्री, एक मंत्री शिमला से
कांग्रेस सरकार के सत्ता में रहते हुए मुख्यमंत्री जिला शिमला से बनता रहा है। इसके अलावा हर बार जिला शिमला से एक कैबिनेट मंत्री भी बनता रहा। पिछली बार शिमला जिले से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह रहे और आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स रहीं।