काली माता का मंदिर नवरात्रों के लिए सजधज कर तैयार
प्राकृतिक आपदा एवं महामारी से रक्षा करती है शिकारी माता
मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए किए पुख्ता प्रबंध : नेगी
अमर उजाला ब्यूरो
डंसा (रामपुर बुशहर)। रामपुर उपमंडल की नोग वैली की डंसा पंचायत में साढ़े नौ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित शिकारी काली माता का मंदिर शरद नवरात्रों के लिए तैयार कर लिया गया है। मंदिर में दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को माता संतान सुख प्राप्ति के साथ प्राकृतिक आपदा सहित दशोटी के लोगों की पूर्ण रक्षा करता है। माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को रामपुर से वाया शिंगला और रचोली सड़क से होकर करीब 30 किलोमीटर दूरी तय कर सनेई गांव पहुंचते हैं। यहां से आगे छोटे वाहनों में चराणी नामक स्थान पर पहुंच कर उससे ऊपर पैदल सफर कर मंदिर में प्रवेश करते हैं।
परशुराम मंदिर समिति प्रधान खेलचंद नेगी के अनुसार मान्यता है कि प्राचीन काल में उस स्थान पर पत्थर की शिला के रूप में खुले आसमान तले माता की पूजा-अर्चना दशोटी के ग्रामीणों की ओर से की जाती थी। धीरे-धीरे लोगों की आस्था माता के प्रति बढ़ती गई। परशुराम मंदिर समिति के सौजन्य से अब लाखों की लागत से मंदिर का निर्माण किया गया है। श्रद्धालुओं के रहन-सहन के लिए सराय का निर्माण भी किया जा चुका है। पेयजल की सुविधा भी लाखों की लागत से उपलब्ध है। मंदिर में साल दर साल क्षेत्र के अलावा बाहरी स्थान से श्रद्धालु माता का आशीर्वाद पाने दरबार में हाजिरी भरते हैं।
समिति के महासचिव जीएल डमालू, दुर्गादत्त शर्मा, एसडी कायथ, चरन दास, श्रवण कुमार, रूपदास, साध राम, गुरजीत हुडन और भगत राम सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि शरद नवरात्रों के लिए मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के रहन-सहन और खाने पीने के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।