नेरवा (रोहड़ू)। उपमंडल चौपाल की ऊबड़-खाबड़ सड़कें कब तक जिंदगियां लेती रहेंगी। जब भी कोई हादसा होता है तो इसके पीछे खस्ताहाल सड़कों को ही जिम्मेदार माना जाता है। एक साल पहले 19 अप्रैल को नेरवा-पांवटा मार्ग पर गुम्मा के समीप उत्तराखंड के विकासनगर की एक निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में 45 लोगों की जान चली गई थी। इसके एक माह के भीतर ही इस स्थान के समीप ही बोलेरो दुर्घटनाग्रस्त हुई। इस हादसे ने भी सात लोगों की जान ले ली थी। पूर्व में हुए हादसों पर नजर दौड़ाई जाए तो उपमंडल चौपाल की सड़कों पर हुए दर्जनों हादसों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। इन हादसों के लिए कहीं न कहीं खस्ताहाल सड़कें ही जिम्मेवार रहीं हैं। इतने हादसे होने के बावजूद क्षेत्र की सड़कों की हालत जस की तस बनी हुई है। सड़कें पक्की बाद में होती हैं, उखड़ना पहले शुरू हो जाती हैं। इसी क्षेत्र के धुआंदली निवासी जोगेंद्र ने बताया कि क्यारनू से लेकर रानवी तक सड़क की हालत खस्ता है। सड़क में गड्ढे ही गड्ढे पड़े हैं। रानवी तक के नौ किलोमीटर मार्ग पर कहीं भी क्रैश बैरियर नहीं। जिस स्थान पर हादसा हुआ। यदि उस स्थान पर पैरापिट होते तो शायद यह दुर्घटना न होती और छह लोगों की जान बच जाती।